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सोलन समाचार

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सबसे पहले सोलन जिला में ढह जाएगी कांग्रेस

सोलन के विधायक व मंत्री से नाखुश है सोलन जिला...

निजी संवाददाता

     सोलन : हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार सत्ता से बाहर जाएगी तो इसकी शुरुआत सोलन जिला से ही होगी। अगले वर्ष में समूचा प्रदेश चुनावी वर्ष में प्रवेश कर जाएगा, इसलिए इस चौथे वर्ष में ही यह बात तय होगी कि प्रदेश में सुक्खू सरकार रिपीट होगी या उसे डिफीट मिलेगी। जहां तक हिमाचल में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों का प्रश्न है उसमें सोलन सबसे पीछे है। यहां न स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी हो पाई हैं और न ही यहां की सड़कें सही हालत में हैं। शिक्षा व्यवस्था तो पूरे जिला में चौपट हो गई है।
     सोलन जिला में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं और पांचों में कांग्रेस के विधायक विराजमान हैं। सोलन विधानसभा के विधायक धनीराम शांडिल प्रदेश सरकार में कबिना मंत्री हैं। कहा जा सकता है कि वही पूरे जिला में सोलन जिला का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन उसके स्वास्थ्य विभाग में ही पहले से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। पांचों विधानसभा क्षेत्रों में न अस्पताल ठीक हैं न प्राथमिक स्वस्थ्य केन्द्र। अस्पताल में इजाज के लिए जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। कसौली, नालागढ़, अर्की और बद्दी (दून) के अस्पतालों की तरफ तो स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पूरे कार्यकाल में गंभीरता से नजर तक नहीं दौड़ाई है।
     जिस तरह की खबरें सोशल मीडिया और अखबारों में छप रही हैं उसे देखकर लगता है यहां सरकार के खिलाफ तेजी से आक्रोश बढ़ रहा है। लोग कहने लगे हैं कि अगले चुनाव में सोलन जिला से एक भी सीट कांग्रेस को मिल जाए तो गनीमत होगी। यही हाल पूरे शिमला संसदीय क्षेत्र की 17 सीटों पर है। मुख्यमंत्री सुक्खविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर और कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की मौजूदा सरकार को बचा ले जाएं तो बात अलग है वरना सोलन और सिरमौर में तो कांग्रेस को उतनी सीटें मिलने की संभावना नहीं है जितनी पिछली बार मिल गई थी।
     सोलन जिला के पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में सोलन नगर, कसौली, परवाणू, कुनिहार, अर्की, बद्दी और नालागढ़ तेजी से विकसित होने वाले शहर और कस्बें हैं। यही वजह है कि यहां लोगों को सरकार से अपेक्षाएं भी ज्यादा रहती हैं। लेकिन सरकार उन अपेक्षाओं को न्यूनतम स्तर पर भी पूरा नहीं कर पा रही है। यहां सरकार के खिलाफ आक्रोश दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यदि सरकार और सोलन के विधायकों ने चौथे वर्ष में इस आक्रोश को शांत नहीं किया तो वह पांचवें वर्ष में सफाई देते रह जाएंगे।

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सोलन का चेस्‍टर हिल्‍स जमीन विवाद के घेरे में

हिमाचली क़षकों के नाम पर खरीदी गई जमीन...

निजी संवाददाता

     सोलन : नगर के बीच बन रहा चैस्टर हिल्स जमीन विवाद के घेरे में आ गया है। कहते हैं कि इस योजना में करीब 300 फ्लैट बनाकर बेचे जाने हैं और यह अरबों रुपए का प्रोजेक्ट है। कहते हैं कि कुछ हिमाचली कृषकों के नाम पर करीब 500 बीघा से अधिक भूमि खरीदी गई जबकि पैसा किसी बाहरी बिल्डर ने लगाया है।
     प्राप्त समाचारों में बताया गया है कि एसडीएम सोलन ने इस मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है। यह भी बताया जा रहा है कि प्रभावशाली लोगों ने एसडीएम की रिपोर्ट को बड़े अधिकारियों के स्तर पर दबाने का प्रयास किया हुआ है। यह मामला उपायुक्त सोलन के संज्ञान में भी आ चुका है। उपायुक्त सोलन ही भूमि सुधार कानून 1971 की धारा 118 के मामलों की सुनवाई करते हैं और उन्होंने पहले भी कुछ फैसले दिए हैं जिसमें बेनामी संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित की गई है।
     सूत्र बताते हैं कि इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने के प्रयास किए जा रहे हैं जबकि कुछ अधिकारी इस मामले पर सख्त कार्यवाही चाहते हैं। फिलहाल मामला अधिकारियों के बीच ही घूम रहा है। इस पूरे मामले की सच्चाई तब सामने आएगी जब यह मामला किसी अदालत से बाहर निकलेगा।।

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गैसे के लिए अफरातफरी

निजी संवाददाता

     सोलन : खाड़ी देशों में चल रही लड़ाई और सरकार के फरमानों के कारण कुकिंग गैस के सिलेंडरों के लिए अफरातफरी मची हुई है। सोलन नगर में भी लोगों को गैस का सिलेंडर लेने के लिए भटकते हुए देखा गया है। आपदा में अवसर का लाभ उठाते हुए भारत सरकार ने जहां कुकिंग गैस के सिलंडर को अब 10 किलो कर दिया है वहीं गैस के सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।
     लोगों में ऐसी अफरातफरी मची हुई है कि वह अपने घरों में गैस के सिलेंडर की जमाखोरी में लग गए हैं। जिन लोगों के घरों में एक सिलेंडर तीन चार महीने चलता है वह भी डीबीसी सिलेंडर भरवाले के लिए अफरातफरी में हैं। लोग पड़ोसियों से खाली सिलेंडर लेकर उन्हें भी भरवाकर रख लेने की फिराक में हैं। ऐसे में सोलन में किसी को गैस मिल रही है किसी को नहीं। जबकि गैस एजंसियों के मालिकों का कहना है कि गैस की कोई कमी नहीं है।।

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हिमाचल में एंट्री टैक्‍स के विरोध में उतरे निजी बस ऑपरेटर

टैक्‍स भारते भरते वाहन मालिकों की कमर टूट गई है...

निजी संवाददाता

     सोलन : निजी बस आपरेटरों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी जारी कर दी है कि यदि टैक्स वृद्धि कम नहीं की और कॉरिडोर बसों पर एंट्री टैक्स बंद नहीं किया, तो ऑपरेटर सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे। संगठनों का कहना है कि 30 से 130 रुपए तक की वृद्धि निजी बस आपरेटरों पर असहनीय आर्थिक बोझ डालने वाला निर्णय है।
     निजी वाहन चालकों को अब 70 रुपये की जगह 130 रुपये शुल्क देना पड़ेगा। 6 से 12 सीट वाले यात्री वाहनों को 130 रुपये और 12 से अधिक वाले वाहनों को 200 रुपये देने होंगे। बड़े मालवाहक वाहनों का 720 की जगह 900 रुपये, निर्माण कार्य की मशीनरी ले जाने वाले वाहनों का 570 की जगह 800 रुपये शुल्क देना पड़ेगा। व्यावसायिक वाहनों से 320 की जगह 600 रुपये, 32 सीटर मिनी बस के 180 की जगह 320, डबल एक्सेल बस और ट्रक के 570 रुपये, ट्रैक्टर के 100 रुपये और रिक्शा के प्रवेश के 30 रुपये लगेंगे। इसी प्रकार अन्य बैरियरों पर टैक्स अदा करते करते वाहन मालिकों की कमर टूट गई है।
     पिछले तीन वर्षों में डीजल पर वैट दो बार बढ़ाए जाने से प्रति लीटर लगभग छह रुपए की वृद्धि हो चुकी है। खाड़ी देशों में युद्ध के कारण जो डीजल और पैट्रोल के दाम बढ़ेंगे उसका तो अभी अंदाजा ही नहीं लग पा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी बस संचालक स्पेशल रोड टैक्स टोकन टैक्स तथा बस अड्डों पर प्रतिदिन 200 से 500 रुपए तक अड्डा शुल्क अदा कर रहे हैं। ऐसे में टोल टैक्स में भारी वृद्धि निजी परिवहन क्षेत्र को आर्थिक संकट की ओर धकेलने वाला कदम है। हिमाचल प्रदेश में 55 टोल बैरियरों की नीलामी से सरकार ने इस बार 185 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है। ऐसे में व्यवसायिक वाहन चालक तो टैक्स ही भरते रह जाएंगे।
     हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष मेहता रघुविन्द्र सिंह ने भी इस मामले को उठाया है। फिलहाल सभी निजी बस ऑपरेटर इस मामले को उठा रहे हैं। इससे प्रभावित टैक्सी, कैटर और प्रायवेट वाहन चालक भी हैं। लोगों का भी कहना है जाने और वापस आने पर ही इतना एंट्री टैक्स लगा दिया गया है जो अब वाहन मालिकों को दुखने लगा है। सरकार वाहन चालकों पर पढ़ने वाले बोझ को कम करे।

 
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