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भारत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कारण नौकरियां बढ़ी चीन में एआई के कारण घटी हैं नौकरियां... विशेष संवाददाता शिमला : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर दुनियां भर में नौकरियां जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि बड़े देशों में एआई के कारण नौकरियां कम हो रही है। जबकि छोटे देशों में एआई के कारण नौकरियों में इजाफा होता हुआ दिख रहा है। भारत की तस्वीर भी अलग नजर आ रही है। अब फिर से वैश्विक से वित्तीय कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एआई से जुड़ी 83,100 नौकरियां बनी हैं, जबकि एआई के कारण 31,921 नौकरियों में कटौती या छंटनी हुई है। यानी जितनी नौकरियां प्रभावित हुईं, उनकी तुलना में करीब 51,000 अधिक नौकरियां एआई के कारण या उससे जुड़े क्षेत्रों में पैदा हुईं हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि एआई का रोजगार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा। तकनीक पारंपरिक कामकाज को तेजी से बदल रही है। कंपनियां दोहराए जाने वाले और नियमित कामों को स्वचालित कर रही हैं, जिससे कुछ भूमिकाओं की जरूरत कम हो रही है। दूसरी ओर एआई से जुड़े नए कौशल और भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है। एआई निवेश से तकनीक के अलावा सेवाओं, उत्पादकता और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को फायदा हो सकता है। नोमुरा के अनुसार एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में एआई से जुड़े कुल 1.31 लाख रोजगार बने हैं। भारत को एआई के रोजगार प्रभाव का अहम परीक्षण स्थल इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि देश बड़ी संख्या में युवाओं के साथ वैश्विक आइटी और बैक-आफिस सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। भारत के रोजगार बाजार में दो अलग-अलग रुझान उभरने की बात कही गई है। एक ओर शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की मांग कमजोर हो रही है वहीं अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारियों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। भारत की 651 आइटी कंपनियों के सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत कंपनियों ने शुरुआती स्तर की भर्ती में कमी की जानकारी दी है। बैंकिंग, बैंक-आफिस संचालन, ग्राहक सेवा और गुणवत्ता जांच जैसे क्षेत्रों में एआई और स्वचालन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर हर जगह सीधे छंटनी के रूप में नहीं दिख रहा। कई कंपनियां नई भर्ती धीमी कर रही हैं और खाली पदों को नहीं भर रही हैं या कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम कराने की कोशिश कर रही हैं। एआई इंजीनियरिंग, माडल संचालन, डाटा प्रबंधन, एआई एकीकरण और एआई आधारित कारोबारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ रही है। आईटी कंपनियों में भर्ती का तरीका बदला है। स्टाफिंग कंपनी एक्सफेनो के आंकड़ों का हवाला देते हुए नोमुरा ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान करीब छह लाख लोगों की भर्ती हुई थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर करीब 1.40 लाख रह गई। यानी, कंपनियां अब एआई का इस्तेमाल करने में सक्षम कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं। विश्व की नजर इस बात पर है कि छोटे देश एआई का लाभ उठाकर अपनी क्षमता को बढ़ाने में लगे हुए हैं जबकि बड़े देशों में जहां पर्याप्त संख्या में नौकरियां हैं वहां एआई से काम की रफ्तार तो बढ़ रही है लेकिन नौकरियां कम होती जा रही है। चीन जैसे देश में एआई के कारण नौकरियां घटने की संभावना दिखने लगी है। कोरिया में भी हालात कुछ चीन जैसे ही है। देखना है कौन देश इससे कैसे निपटता है। |
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