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बिहार से उठा एसआईआर का बवाल हिमाचल पहुंचने वाला है

निर्वाचन आयोग ने तैयार रहने को कह दिया...

विशेष संवाददाता

     शिमला : बिहार से उठा एसआईआर का बवाल अब हिमाचल प्रदेश पहुंचने वाला है। हलांकि हिमाचल में उस प्रकार की बाधाएं आने की कम संभावनाएं हैं जैसी बिहार और कुछ और राज्यों में बनी हुई हैं। अनुमान लगाया जा रहा है हिमाचल में भी लाखों वोट मतदाता सूची से कट जाएंगे। लेकिन जिन लोगों के वोट गलत ढंग से कटेंगे वह फिर से शामिल किए जा सकेंगे क्योंकि हिमाचल एक छोटा राज्य है और पोलिंग बूथ भी छोटे छोटे हैं। लोग आसानी से अधिकारियों से संपर्क कर अपने वोट को ठीक करवा लेंगे।
     पिछले दिनों चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश सहित 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के सचिव ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लेटर लिखकर एसआईआर से जुड़ी तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा है। एसआईआर प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने पहले फेज में बिहार में एसआईआर करवाया था। जिस पर बड़ा बवाल खड़ा हुआ था। दूसरे फेज के तहत 12 राज्यों में एसआईआर जारी है।
     एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसके दायरे में आ जाएंगे। आयोग ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भी पत्र लिखकर तैयारी पूरी करने को कहा है। इन राज्यों में बिहार जैसा बवाल उठने की पूरी संभावनाएं हैं। इसके कुछ प्रदेशिक कारण भी हैं यहां पर राजनीति भी काफी तीव्र है। इन राज्यों के अलावा चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भी तैयार रहने को कहा गया है।
     निर्वाचन आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था। चुनाव आयोग ने इस वर्ष 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संशोधन (एसआईआर) व असम में एक विशेष पुनरीक्षण का काम शुरू किया है। शेष 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया इस वर्ष करने की तैयारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके कारण चुनाव आयोग लगातार सुर्खियों में रहा, उसके बाद पूरे देश में लोग एसआईआर के प्रति जागरूक भी हो गए हैं।
     सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को असम में मतदाता सूचियों का एसआईआर कराने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग की इस दलील पर संज्ञान लिया कि असम में अंतिम मतदाता सूची पहले ही तैयार हो चुकी है और याचिका निष्प्रभावी हो गई है।
     जाहिर है जब इन सभी राज्यों में एसआईआर होगा तो वहां भी अपनी आशंकाओं के चलते कुछ मामले अदालतों में भी जाएंगे। जो दस्तावेज चुनाव आयोग ने मांगे हैं वह दस्तावेज उपरोक्त राज्यों के मतदाताओं के पास भी नहीं होंगे। ऐसे में यहां भी वैसे स्थित उत्पन्न हो जाएगी कि नागरिक भारत का नागरिक को रहेगा लेकिन वोट डालने के अधिकार से वंचित हो जाएगा। हिमाचल में इसे लेकर क्या होता है इस पर सभी की निगाहें हैं।

 
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