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हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र
Hindi Weekly News
Paper of India
SANJAY HINDWAN
Editor
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Saproon, Solan, Himachal Pradesh- 173211 (INDIA) Contact : +91 94181 04770 |
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समय के साथ साथ शूलिनी मेला भी दो भागों में बंटकर रह गया है। एक भाग भक्तिभाव से ओत प्रोत होता है और दूसरा हो-हुल्लड़बाजी में डूबा हुआ। कहा जा सकता है सोलन के बाजार में लगने वाला शूलिनी मेला मां शूलिनी की पालकी के नगर भ्रमण के साथ संपन्न होता है और दूसरा सोलन के ठोडो मैदान में जहां लूटपाट का साम्राज्य कायम रहता है। दो भागों में विभाजित हो चुके इस मेले में जहां निशुल्क भंडारे लगाए जाते हैं वहीं ठोडो मैदान में आम जनता से एकत्र पैसे उड़ाए जाते हैं। सोलन के लोग जहां बाजार में लगने वाले मेले को ही असली मेला मानते हैं। वहीं ठोडो मैदान में मेले के दौरान जहां झूले से लेकर स्टालों की लूटपाट होती है उसके चरचे सुनाए जाते हैं। जिला प्रशासन ठोडो मैदान से जहां करोड़ों रुपए की उगाही करता है वहीं मां शूलिनी के नाम पर जिला भर से चंदा एकत्र किया जाता है। शूलिनी मेले के दौरान उद्योगपतियों, फैक्टरी वालों, ट्रक, बस, ओटो और टैंपो से लेकर कई संस्थाओं से इस प्रकार चंदा उगाही की जाती है कि वह शूलिनी मेले में चंदा देने के बाद तौबा कर लेते हैं। जिला प्रशासन ने सोलन जिला में चंदा देने वालों को ‘सोशल ऑबलिगेशन’ शब्द ही भुला दिया है। जिला के छोटे छोटे गांवों में कई तरह के मेले और कार्यक्रम होते हैं। ऐसे कार्यक्रम भी दुकानदारों और व्यापारियों के चंदे से ही चलते हैं। लोग जब आपे छोटे से कार्यक्रम के लिए चंदा मांगने जाते हैं तब व्यापारी अपनी व्यथा बताते हैं कि फलां अफसर का फोन आया था और उसे हमने अपनी क्षमता से ज्यादा चंदा दे दिया है। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि मां शूलिनी के नाम पर जिला प्रशासन किस प्रकार चंदा उगाही करता है। और इस चंदा उगाही के पीछे मां शूलिनी के नाम पर ठोछो मैदान में आयोजित होने वाले हो-हुल्लड़ वाजे कार्यक्रम ही हैं। जारी... |
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