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हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

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कोकरोच, चाय के प्‍याले में तूफान

     कोकरोचों का प्रदर्शन चाय के प्याले में तूफान साबित हुआ। जिस हिसाब से इस बात का प्रचार किया गया कि देश के युवा कोकरोच जनता पार्टी के बैनर तले करोड़ों के संख्या में एकत्र हो चुके हैं ऐसा दिल्ली के जंतर मंतर में हुए प्रदर्शन में नहीं दिखा। कोकरोचों के दिल्ली प्रदर्शन से बड़ा प्रदर्शन तो हरियाणा के कुरुक्षेत्र और पानीपत के युवाओं ने कर डाला। बोस्टन अमेरिका में बैठे एक युवा अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद कोकरोच जनता पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया और कुछ ही दिन में उन्हें सोशल मीडिया में करोड़ो फोलोअस मिल गए। बस इस बात को बबंडर देश-दुनियां में चलता रहा। 6 जून को दीपके भारत आए और जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में जितना हो हल्ला मचा उसके अनुपात में कुछ भी लोग जंतर मंतर में नहीं थे। फिलहाल सात दिन का अल्टेमेटम देकर इस मामले को शांत कर दिया गया। कोकरोच जनता पार्टी ने नीट सहित अन्य पेपर लीक होने पर भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। लेकिन यह प्रदर्शन चाय के प्याले में तूफान के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं था। अब तरह तरह की बातें कोकरोचों के संगठन और आंदोलन को लेकर की जा रही हैं।     जारी...

 

सरकार रिपीट करवाने के लिए सुक्‍खू कांगड़ा मजबूत कर रहे हैं

     पंचायती चुनावों के परिणाम जिस तरह सामने आ रहे हैं उससे करीब ढेड़ वर्ष बाद होने वाले विधानसभा की तस्वीर भी सामने आने लगी है। ऐसा लगता है सुक्खू हमीरपुर और कांगड़ा संसदीय सीट पर अपना ध्यान केन्द्रीत किए हुए हैं। कांगड़ा में उनके विरोधी भी कम होते जा रहे हैं। हिमाचल के 51 शहरी निकायों के रुझानों के मुताबिक भाजपा का परचम लहरा रहा है। इनमें अधिकतर शिमला और मंडी संसदीय क्षेत्र की हैं। यही वजह है कि कांग्रेस थोड़ी पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है। चार नगर निगमों धार्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन के चुनाव परिणाम भी आ चुके हैं। इनमें कांग्रेस के वोट प्रतिशत में कोई खास कमी नहीं आई है। यही आभास होने लगा है कि माइक्रो लेवल की राजनीति किस ओर पलट रही है। शिमला संसदीय क्षेत्र के सोलन नगर निगम के लिए सबसे कम मतदान 64.20 फीसदी हुआ। जबकि हमीरपुर में सबसे अधिक 89 फीसदी मतदान हुआ। प्रदेश भर में कुल 69.16 फीसदी मतदान हुआ। कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का अंतर भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। जिला स्तर पर देखें तो हमीरपुर में सबसे ज्यादा 78.89 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद शिमला में 77.36 फीसदी और ऊना में 77 फीसदी मतदान हुआ। वहीं, सबसे कम मतदान सोलन जिले में 64.20 फीसदी रहा।       .जारी..

 

दर्जनों झटके खाने के बाद सरकार लाइन पर

     दर्जनों झटके खाने के बाद सुक्खू सरकार लाइन पर आ गई है। अब हिमाचल प्रदेश में नर्सरी शिक्षक प्रशिक्षण (एनटीटी) कोर्स को डाइट जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान केंद्रों में शुरू करने की दिशा में सरकार ने एक कदम उठाया है। इससे पहले जयराम सरकार को भी एनटीटी टीचर भर्ती को लेकर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने दिन में तारे दिखा रखे थे। वह भी कोई भर्ती नहीं कर सके थे। पिछले लगभग दो दशक से राज्य में 6200 से कहीं अधिक एनटीटी टीचर के पदों की भर्ती प्रक्रिया पात्र एनटीटी शिक्षकों के नहीं मिलने के कारण अटकी हुई है। हिमाचल प्रदेश में एक भी एनटीटी कोर्स करवाने वाली मान्यता प्राप्त संस्था नहीं है। सरकार की मजबूरी यह है कि एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थान के छात्रों को ही एनटीटी टीचर लगाया जा सकता है। ग्रास साप्ताहिक ने बार बार प्रदेश सरकार को इस विषय पर चेताया है। पूर्व जयराम ठाकुर सरकार के समय से कुलांचे मार रही हिमाचल प्रदेश सरकार शायद अब रास्ते पर आती हुई नजर आ रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय एनसीटीई से औपचारिक अनुमति मांगी है। इस अनुमति को प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार को एनटीटी की मान्यता प्राप्त संस्थान खोलना होगा और वह प्रदेश सरकार को बताएगी कि उनकी मान्यता प्राप्ती की क्या क्या शर्तें हैं।      जारी...

 

जंगल में आग लगी, वन विभाग फंड जुटाने में लगा था

     हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष जब जंगलों में आग लगी लगी हुई थी तो वन विभाग फंड जुटाने में लगा हुआ था। हर वर्ष वनों में लगने वाली आग के लिए भले ही वन विभाग समय रहते कोई सार्थक पहल न करता हो लेकिन केन्द्र सरकार से फंड मांगने में वह उत्सुक रहता है। इस बार भी वन विभाग ने ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना को लेकर सभी वन मंडलाधिकारियों को प्रस्ताव भेजने के आदेश दिए है। उपरोक्त दोनों योजनाओं के लिए केंद्र से बजट मुहैया करवाया जाता है। फिर भी हर वर्ष धू धूकर जलने वाले जंगलों की सुरक्षा के बारे में कोई बात नहीं की जाती। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। प्रश्न यह खड़ा होता है कि ऐसे में ग्रीन इंडिया मिशन हिमाचल में कैसे चलाया जा रहा है यह तो वन विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं। अब जब जहां जंगलों में आग लगी हुई थी तो प्रदेश के सभी वन मंडलों में नगर वन योजना और ग्रीन इंडिया मिशन कैसे चलेगा इसके लिए सभी वन मंडल अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें गए। जबकि यह कार्य दो तीन माह पहले शुरू हो जाना चाहिए था ताकि मौजूदा आग से वनों को बचाया जा सकता। कहते हैं कागजों पर वन मंडल अधिकारियों को आगामी तीन वर्षों के लिए किए जाने वाले कार्यों को शामिल करना था।       जारी...

 

भारती कांग्रेस से बाहर

     कांग्रेस के तेज तर्रार नेता नीरज भारती कांग्रेस से बाहर हो गए हैं। कुछ कांग्रेसी कह रहे हैं उन्हें कांग्रेस से बाहर किया गया है, कुछ कहते हैं उन्होंने स्वयं पार्टी से इस्तीफा दिया है, जिसे मंजूर कर लिया गया है। भारती ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के कथित आरोप लगाए। इन आरोपों की पूरे प्रदेश में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद उनके पिता जो प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री चंद्र कुमार हैं ने पत्रकारवार्ता करके नीरज भारती को गलत ठहराया। इसके अगले ही दिन नीरज भारती ने अपने पिता के खिलाफ ही सोशल मीडिया में बयान देकर उनसे अपने राजनैतिक रिश्ते समाप्त करने की घोषणा कर डाली। मुख्यमंत्री ने भी भारती को नशेड़ी कह दिया। इस प्रकरण को लाखों लोगों ने देखा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की कार्यकारिणी में नीरज भारती उपाध्यक्ष बनाए गए थे। वह स्वयं भी कांग्रेस पार्टी की ओर से विधायक रह चुके हैं। हलांकि वह अपनी सोशल मीडिया पोस्टस को लेकर सदा विवादों में रहे हैं। अब नीरज भारती राजनैतिक दलों से शायद आजाद हो गए हैं, उनके भाजपा में जाने की संभावनाएं न के बराबर हैं। इसका कारण यह है कि उन्होंने भाजपा की महिलाओं के खिलाफ भी कई अभद्र पोस्टें डाली थी। प्रदेश के लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर नीरज भारती को क्या हो गया। वह इतने गुस्से में क्यों हैं।      जारी...

 

खाड़ी युद्ध में ईरान का लोहा मान लिया पूरी दुनियां ने

     ईरान के खिलाफ इज़राइल- अमेरिका युद्ध में ईरान का लोहा पूरी दुनियां ने मान लिया। इस युद्ध में सबसे ज्यादा फजिहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हो रही है जो सोच रहे थे कि पहला हमला करते ही ईरान में तख्तापलट हो जाएगा। ट्रंप ने इस युद्ध के दौरान बड़े बड़े दावे किए लेकिन धारातल पह वह सच होते हुए नहीं दिखे। अखिर में ट्रंप को सरेडर की स्थिति में आते हुए कई तरह के प्रयास करते हुए देखा गया। अब जो ताजा हालात बने हुए हैं उसमें साफ दिखता है कि अमेरिका इस युद्ध से अपने हाथ पीछे खींच रहा है और ईरान ने अमेरिका को अपने निशाने पर लिया हुआ है। खाड़ी देशों में ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया और अमेरिका को खाड़ी देशों को छोड़कर चले जाने की चेतावनी भी दे डाली है। उधर मुख्य लड़ाई लड़ने वाला देश इज़राइल इस युद्ध से हटने को तैयार नहीं है और उसने अपने हमले जारी रखे हुए हैं। ईरान ने इज़राइल को तो मलियामेट कर ही दिया है और अभी इस युद्ध के लंबा खिंचने के आसार बने हुए हैं। अभी भी ईरान ने भी इज़राइल पर हमले का जावब हमले से देना जारी रखा हुए है।      जारी...

 

दलाईलामा को लेकर चीन ने भारत को चेताया

     तिब्बत के धर्मगुरू दलाईलामा के उत्तराधिकारी को लेकर भारत और चीन के संबंध एक बार फिर से खराब हो सकते हैं। भारत ने तिब्बत के लोगों को अपने यहां शरण दे रखी है और वह भारत में बेखौफ होकर रहते हैं। यह बात चीन को समय समय पर खटकती रहती है। अब नया विवाद यहां यह खड़ा हो गया है कि दलाईलामा के बाद उनके सिंहासन पर कौन विराजमान होगा। फिलहाल चीन ने भारत को दलाईलामा के उत्तराधािकार के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। बीजिंग ने कहा कि दलाईलामा के पुनर्जन्म और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। साफ है कि चीन चाहता है कि भारत इस मामले में कोई दखलंदाजी न करे। जबकि तिब्बत के लोग अपनी सभी परंपराएं भारत में रहकर निभाते हैं। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बयान जारी कर कहा कि दलाईलामा का पुनर्जन्म सदियों पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक परंपराओं के तहत होता है। इस प्रक्रिया के लिए चीन की केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी होती है और 14 वें दलाई लामा को भी इसी प्रक्रिया के तहत मान्यता दी गई थी। चीन चाहता है कि आगे भी वह इसी परंपरा के अनुसार तिब्बतियों के धर्मगुरू दलाईलामा के उत्तराधिकारी का चयन करे। चीनी दूतावास ने भारत को तिब्बत पर अपने पुराने रुख की याद भी दिलाई।     जारी...

 

किरकिरी हो रही है आप के केजरीवाल की

     आम आदमी पार्टी (आप) में बगावत के लिए अरविंद केजरीवाल की काफी किरकिरी हो रही है। क्योंकि केजरीवाल ने ही आम कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज कर बागी सैलिब्रिटीज को कार्यकर्ताओं के सिर पर बिठा दिया। बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा में उसके 10 में से सात सांसद पार्टी छोड़कर चले गए हैं। दिल्ली हारने और इस घटना के बाद इंडिया गठबंधन में भी केजरीवाल का महत्व कम हो गया है। अभी आठ जून को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में भी केजरीवाल को कोई महत्व नहीं दिया गया। केजरीवाल पंजाब चुनाव को लेकर चिंतित हैं। लेकिन सांसद राघव चड्ढा के नेतृत्व में हुई इस बगावत के बाद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसमें संशय खड़ा करने का प्रयास किया गया कि आप के बागी सांसद भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। बाद में आप पर आरोप लगाते हुए राघव ने कहा, चार अन्य सांसद स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता ने भी पार्टी छोड़ने के पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बगावत को करने वालों में सबसे चैंकाने वाला नाम अशोक मित्तल का है जिन्हें आप ने हाल ही में राघव को हटाकर राज्यसभा में पार्टी का उपनेता बनाया गया था। इससे दस दिन पहले उनके कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापे मारे थे।           जारी...

 

संपाकीय         आखिर लोग जिंदा कैसे रहेंगे

     भारतीय लोकतंत्र की बात करने के अब कोई मायने नहीं रह गए हैं। अब तो सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि भारत में अब लोग जिंदा कैसे रहेंगे। महंगाई काबू से बाहर होती जा रही है। नौकरियों के लिए युवा प्रदर्शन करने पर आमादा हैं। डीजल पैट्रोल के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। लाखों रुपए खर्च कर परीक्षाएं देने के बाद पेपर लीक हो रहे हैं। नागरिक सुरक्षा की कोई गारंटी अब बची नहीं है। तंत्र के किसी कोने से यह आवाज नहीं आ रही है कि नागरिकों को किसी प्रकार का सुकून मिल सके। पूरा तंत्र समझौतावादी हो चुका है। बावजूद इसके सत्तारूढ़ दल चुनाव पर चुनाव जीतता चला जा रहा है।
     भारत वर्ष में इस असमंजस की स्थिति में लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि आखिर वह आने वाले समय में जिंदा कैसे रहेंगे। देश में उनकी कमाई का कोई जरिया बचेगा भी या नहीं। पढ़े लिखे युवा जिस प्रकार से देश से पलायन करने पर मजबूर हैं यह स्थिति उनके लिए भी काफी गंभीर है। जिन देशों में भारत के युवा नौकरियां करने जाते रहे हैं वहां भी सरकारें भारत के लोगों के घुसने पर पाबंदियां लगाती जा रही हैं। इससे एक बात और घटित हो रही है कि काबिल लोग भारत को छोड़ने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे। ऐसे में काबिल लोगों के अभाव में देश को कैसे लोग चलाएंगे इसका अंदाजा कोई भी सहजता से लगा सकता है। जो लोग देश के बारे में चिंता करने वाले हैं उनकी बातें भी बेअसर साबित होती जा रही हैं। जाहिर है यह आवाजें भी आने वाले समय में दबती चली जाएंगी।       
....जारी

 

हिमाचल में पाइप्‍ड कुकिंग गैस किचन तक पहुंचने का इंतजार

     देश के बड़े शहरों की तरह अब कुछ ही समय में हिमाचल के शहरी इलाकों में पाइप्‍ड लाइन के जरिए कुकिंग गैस पहुंचा दी जाएगी। इससे लोगों को जहां गैस सिलेंडर लाने ले जाने के झंझट से छुटकारा मिल सकेगा वहीं यह काफी सस्ती भी पड़ेगी। प्रदेश सरकार एलपीजी पाइप्‍ड नेचुरल गैस की पहुंच लोगों के किचन तक पहुंचाने के लिए सीजीडी यानि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागों को इस कार्य में सहयोग करने को कहा है। सरकार की ओर से लंबित आवेदनों पर शीघ्र कार्यवाही करने और निधरारित मानकों के अनुसार समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव सीजीडी कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित कर प्रक्रियाओं में तेजी लाने को कहा है ताकि लोगों को शीघ्र इस सुविधा का लाभ मिल सके। कहते है कि हिमाचल के ऊना जिले में लगभग 13,000 घरों तक पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिनमें से करीब 6,000 उपभोक्ता वर्तमान में खाना बनाने के लिए प्राकृतिक गैस का उपयोग कर रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि इसी तरह का नेटवर्क प्रदेश के अन्य नगरों में भी स्थापित किया जाए।       जारी...

 

एनटीटी भर्ती नहीं होगी

     हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव को एनसीटीई ने अस्वीकार कर दिया है। प्रदेश सरकार को करीब दो दशक से बार बार समझाने के बाद भी इस ओर अभी तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है और अब फिर से एनसीटीई ने प्रदेश सरकार के एनटीटी के एक वर्ष के डिप्लोमा की शर्त को भी स्वीकार करने के निर्णय को नकार दिया है। ऐसे में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रदेश सरकार फिर से नए सिरे से फजिहत हो गई है। एनसीटीई ने आंगनबाड़ी वर्करों को भी प्री नर्सरी टीचर के लिए अपात्र बता दिया है। इस संबंधा में केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा विभाग को पूरी जानकारी भेज दी है जिसमें आंगनबाड़ी वर्करों को ब्रिज कोर्स करवाने की बात को भी दरकिनार कर दिया गया है। राज्य में बीते वर्ष से 6267 पदों पर एनटीटी भर्ती अब प्रदेश में नए सिरे से शुरू होगी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रयास किए गए फिर भी एससीटीई के नियम और शर्तों के मुताबिक उपयुक्त डिप्लोमाधारक नहीं मिलने से भर्ती प्रक्रिया पर अब रोक लग गई है। राज्य में केवल 87 अभ्यर्थी ही एनटीटी भर्ती के लिए उपयुक्त पाए गए थे। केंद्र सरकार के निर्णय के चलते अब राज्य में एक साल के डिप्लोमाधारकों को भी बड़ा झटका लग गया है। इसमें प्रदेश सरकार बेरोजगार युवाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है जिस कारण करीब नौ हजार से अधािक एनटीटी टीचरर्स की नौकरियां रुकी पड़ी हैं।         जारी...

 

शिमला का 13 किलोमीटर लंबा रोप वे प्रोजेक्‍ट खटाई में पड़ा

     बहुचर्चित शिमला का रोप वे प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया है। इसकी लागत लगभग डबल होने पर भारत सरकार से क्लियरेंस तो आ गई थी लेकिन अब उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस प्रोजेक्ट पर स्टेट शेयर को लेकर पहले वित्त विभाग से गारंटी लेने को कहा है। इससे लगता है कि प्रदेश सरकार की इसमें सांसें फूल गई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है हिमाचल प्रदेश की आर्थिक कंगाली। इस प्रोजेक्ट को बाह्य वित्त पोषण के जरिए एनडीबी यानी ब्रिक्स बैंक फंड कर रहा है लेकिन 80 और 20 फीसदी हिस्सेदारी के कारण राज्य सरकार पर जो लागत 388 करोड़ पुराने टेंडर से बन रही थी वह बढ़कर 540 करोड़ हो गई है। इसलिए उप मुख्यमंत्री ने रोपवे ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन से कहा है कि वह पहले वित्त विभाग से स्टेट शेयर पर गारंटी ले ले। वित्त विभाग के पास इस तरह के प्रोजेक्ट में पैसा देने के लिए परिस्थितियों बनेंगी या नहीं, यह फाइल पर ही पता चलेगा। इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट में ही होगा। करीब 13.79 किलोमीटर लंबे इस रोपवे की लागत पहले 1556 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 2980 करोड़ हो गई है। तीन बार टेंडर करने के बाद इसके लिए आस्ट्रिया की एक कंपनी आगे आई थी। सिंगल टेंडर पर भारत सरकार की राय लेने के लिए हिमाचल सरकार ने इसे वित्त विभाग के आर्थिक मामले विभाग को भेजा था।    जारी...

 

हिमाचल की दवा कंपनियों को बंद किया जाए

     हिमाचल प्रदेश में बनने वाली दवा कंपनियों को बंद कर दिया जाए तो ही अच्छा है। जब भी यहां बनी दवाओं की गुणवत्ता की जांच होती है तो बार बार इनके सैंपल फेल हो जाते हैं। प्रदेश सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। एक बार फिर केंद्रीय औषधाि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और विभिन्न राज्य दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं की जांच में देशभर की 141 दवाएं व अन्य हेल्थकेयर उत्पाद गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 47 दवाएं भी शामिल हैं, जो देश में सबसे अधािक हैं। इन दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, ऊना, परवाणू, काला अंब, कांगड़ा और पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फार्मा इकाइयों में हुआ था। यह खुलासा मार्च 2026 में जारी ड्रग अलर्ट में हुआ है जिसने प्रदेश के फार्मा हब होने के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य दवा नियंत्रक का वही प्रेस नोट नई तारीख के साथ बाहर आ गया है, जिसके कोई मायने नहीं हैं। हिमाचल में निर्मित फेल हुई दवाइयों में अमोक्सिसिलिन व पोटेशियम क्लेवुलानेट, डाइक्लोफेनाक, पैरासिटामोल व क्लोरजोक्साजोन, पोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन, पैरासिटामोल, प्रो क्लोरपेराजीन क्लारपराज पेराजीन माउथ डिसॉल्विंग, ....     जारी...

 

सोलन समाचार

 

हिमाचल समाचार

शिल्‍ली और सेरी के बीच चली जंग में शिल्‍ली ने बाजी मारी

कीर्तिमान स्‍थापित करने से 13 वोट पीछे रह गए रमेश बंसल

मेयर को लेकर फंसा पेंच

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कांग्रेस भाजपा में दावाबाजी

हिमाचल प्रदेश के निगम चुनावों में भाजपा को मिली बड़ी जीत

पंत मुख्‍य सचिव बने

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