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योगी को
निपटाने के चक्कर में शंकराचार्य
 कहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी
अदित्यनाथ को निपटाने के चक्कर में तो नहीं आ गए हैं। माघ माह में गंगा स्नान
में व्यवधान से शुरू हुआ विवाद अब गौ हत्या के खिलाफ कानून बनाने तक पहुंच गया
है।
यह सभी को विदित है कि प्रयागराज प्रशासन ने शंकराचार्य को माघ के गंगा स्नान
से वंचित कर दिया। शंकराचार्य अपनी पालकी सहित गंगा के छोर तक जाना चाहते थे
लेकिन उन्हें बलपूवर्क रोक दिया गया। यह सारी घटना देशवासियों को पता है। इसके
बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से ही इंकार कर दिया गया। अब
लगता है शंकराचार्य ने भी योगी आदित्यनाथ को निपटा देने का प्रण ले लिया है और
उनके जो वक्तव्य आ रहे हैं वह इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश का
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे व्यक्ति को नहीं होना चाहिए। इसके लिए
उन्होंने अब 40 दिन का अल्टेमेटम योगी को दिया है कि वह गौ हत्या के खिलाफ
कानून लेकर आएं अन्यथा वह 11 मार्च को लखनऊ के संतसमागम में योगी को हटाने का
खुला ऐलान कर देंगे। यह बात भी सभी जानते हैं कि भाजपा में रहते हुए योगी के
लिए ऐसा कानून लाना संभव नहीं है।
जारी...
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आईएएस अधिकारियों के खिलाफ टिप्पणी गलत

हिमाचल प्रदेश मंत्रिपरिषद के कुछ सदस्यों द्वारा आईएएस अधिकारियों के
खिलाफ जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से टिप्पणियां की जा रही हैं वह गलत हैं। पिछले
दिनों हिमाचल में मंत्रिपरिषद के कुछ मंत्रियों में आईएएस अधिकारियों के खिलाफ
रोष देखने को मिला है।
कहते हैं कि प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसकी शुरुआत मंडी
रैली के खुले मंच से की थी। तब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी मंच पर
विराजमान थे। फिर इसी बात को लेकर लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य
सिंह ने बात को नए सिरे से शुरू किया। इस बार इस मामले में प्रतिक्रिया काफी
तीव्र हुई है। हिमाचल की मंत्रिपरिषद दो भागों में बंटी हुई नजर आ रही थी।
प्रदेश की आईएएस और आईपीएस लॉबी ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
कहा जा सकता है कि अपनी ही मंत्रिपरिषद से ऐसे सदस्यों को कुछ शिकायतें हैं
जिन्हें मंत्रिपरिषद की बैठकों में नहीं सुना जा रहा है। जाहिर है तभी
मंत्रिपरिषद के सदस्यों को यह बात सार्वजनिक रूप से कहनी पड़ रही है। हलांकि यह
बात मंत्रिपरिषद तक ही सीमित रहती तो ज्यादा अच्छा होता। अब मामला सबके सामने आ
ही गया है तो इस पर गंभीर चिंतन किया जाना भी जरूरी है।
आईएएस और आईपीएस के खिलाफ की जा रही टिप्पणी अच्छी नहीं है।
.जारी..
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मंडी में विनय
कुमार के सामने ही आपस में भिड़ गए कांग्रेसी
पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर की पुत्री चंपा
ठाकुर के पदग्रहण करने के बाद ही मंडी का विपाशा सदन एक जंग में तब्दील हो गया।
प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष विनय कुमार के सामने ही मंडी के दो
नेताओं में जुबानी जंग छिड़ गई। इस घटना के बाद शिमला के राजीव भवन की वह बैठक
भी याद आने लगी जब वहां वीरभद्र समर्थक और सुक्खू समर्थकों में सिरफुटव्वल शुरू
हो गई थी।
इस समय भी जहां प्रदेश के मंत्रियों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें आने लगी हैं तो
कार्यकर्ताओं संगठन तक उसकी आंच पहुंचना स्वाभाविक ही है। मंडी में भी कुछ ऐसा
ही हुआ। दरअसल हुआ यूं कि इस कार्यक्रम के मंच पर ही पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी
और पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर आमने-सामने हो गए। इससे माहौल गरमा
गया। कार्यकर्ता भी अपने नेताओं के पक्ष में पंडाल में खड़े हो गए और नारेबाजी व
बहसबाजी करने लग गए। जोश में पंडाल में वीरभद्र सिंह, सुखविंद्रर सिंह सुक्खू
और प्रकाश चौधरी के नाम के नारों से माहौल तनावपूर्ण हो गया। जिला कांग्रेस
अध्यक्ष चंपा ठाकुर के पदभार ग्रहण के पहले दिन ही कांग्रेस की गुटबाजी और
नाराजगी उजागर होकर सामने आ गई।
जिला कार्यकारिणी को लेकर सोहन लाल ठाकुर के बयान पर पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी
ने नाराजगी जताई। मंच पर ही प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार भी मौजूद थे।
जारी...
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सत्ता की ताकत
का खेल चल रहा है पश्चिम बंगाल में
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम
कोर्ट के समक्ष नेश होकर पश्चिम बंगाल का दुखड़ा सुनाया है। जहां अब कुछ ही
दिनों बाद राज्य विधानसभा चुनाव हैं वहां सत्ता की ताकत का खेल खुले आम शुरू हो
गया है। केन्द्र में जहां मोदी सरकार सत्ता पर काबिज है वह बंगाल चुनाव जीतने
के लिए हद से गुजर जाने को तैयार दिखती है। वहीं पश्चिम बंगाल में जहां टीएमसी
की सरकार है वह भी सत्ता में आने के लिए केन्द्र सरकार पर कांउटर अटैक कर रही
है।
पूरी दुनियां पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का नंगा नाच देख रही है। यहां भारत के
संविधान का मतलब सत्ता की ताकत रह गया है। पिछले दिनों से एसआईआर को लेकर
केन्द्र सरकार ने जो चाल चली है ममता बनर्जी ने उसे नाकाम काने के लिए राज्य की
ताकत का इस्तेमाल किया। यहां भारत के संविधान की बात करना तो दूर की कौड़ी हो
गया है। यदि कोई संविधान की ताकत पर चुनाव की बात करता है तो उसका जवाब किसी के
पास नहीं है। जब पश्चिम बंगाल के चुनावों में भारत के संविधान का का जब कोई
जवाब ही नहीं देगा तो फिर वहां कैसा लोकतांत्रिक चुनाव होगा इसका अंदाजा हर कोई
लगा सकता है।
हरियाणा, से लेकर महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में जो खेल भारतीय चुनाव आयोग ने
खेला वहीं खेल अब पश्चिम बंगाल में खेला जा रहा है। जारी...
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राज्यपालों को क्या हो गया
देश भर के राज्यपालों को ये क्या हो गया है। वह विपक्ष की राज्यों में
गठित लोकतांत्रिक सरकारों के प्रति अपनी आंखें तरेरने लगे हैं। बंगाल, पंजाब और
महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में राज्यपालों की भूमिका का देशवासियों ने देख
लिया है। यह बात भी अब कही जा सकती है कि राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों का
निर्वाह नहीं कर रहे हैं।
केरल और तमिलनाडु के बाद अब नया विवाद कर्नाटक में भी सरकार और राज्यपाल
थावरचंद गहलोत के बीच टकराव सामने आ गया है। राज्यपाल ने विधानमंडल के संयुक्त
सत्र में अपने संबोधन की सिर्फ दो पंक्तियां पढ़ी और भाषण समाप्त कर दिया। जबकि
वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। सरकार द्वारा दिया गया संबोधन पढ़ना राज्यपालों की
संवैधानिक बाद्यता है। इस पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त
की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह सरकार की ओर से तैयार भाषण की बजाय अपना
तैयार किया भाषण पढ़कर चले गए। पिछले दो दिन में दक्षिण भारत के गैर भाजपा शासित
राज्यों में राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की यह तीसरी घटना है। इससे पहले
कर्नाटक के अलावा पड़ोसी केरल और तमिलनाडु में भी ऐसा हो चुका है। विधानसभा और
विधानपरिषद के संयुक्त सत्र में अपने संक्षिप्त भाषण के बाद गहलोत बाहर निकल
गए। कांग्रेस सदस्यों ने पूरा अभिभाषण पढ़े बिना राज्यपाल के चले जाने पर कड़ी
नाराजगी जताई और सदन में इसके खिलाफ नारे लगाए। वहीं, राज्यपाल का बचाव करते
दिख रहे भाजपा के सदस्यों ने भारत माता की जय के नारे लगाए। इससे पहले गहलोत ने
राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इन्कार ही कर दिया था।
जारी...
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शून्य तापमान के साथ हिमाचल कड़ाके की सर्दी में
हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बीच जनवरी के
दूसरे पखवाडे में बदलाव शुरू हो गया है। पश्चिमी विक्षोभ के अधिक सक्रिय होने
के चलते पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी और मैदानी व मध्यपर्वतीय क्षेत्रों
में भारी हुई है। अभी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार जताए गए हैं।
इसका अच्छा असर खेती पर पड़ेगा, खासकर मैदानी इलाकों में जहां पिछले तीन महीनों
से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए थे।
अब शून्य डिग्री तापमान के साथ ही समूचा हिमाचल प्रदेश कड़ाके की सर्दी में है।
हलांकि फरवरी माह में अच्छी धूप खिला है। जनवरी मध्य में लाहौल-स्पीति, कुल्लू,
किन्नौर, बिलासपुर, मंडी, सोलन, चंबा और शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में न्यूनतम
तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया। कांगड़ा व हमीरपुर में पारा शून्य तक
पहुंचा है। सबसे कम तापमान लाहौल-स्पीति के ताबो में माइनस 8.7 डिग्री और
कुकुमसेरी में माइनस 7.1 डिग्री रहा, इसके बाद कल्पा में माइनस 2.0 डिग्री दर्ज
हुआ, रिकांगपिओ 0.4, सेओबाग 0.5, बरठीं 0.3. भुंतर 1.0, सुंदरनगर 1.4, हमीरपुर
1.3, सोलन 1.6, मनाली 1.5, मंडी 2.5, पालमपुर 3.0, ऊना और कांगड़ा 3.4, बिलासपुर
3.5, कुफरी 4.0, धर्मशाला 5.0, शिमला 5.6, जुब्बड़हट्टी 6.2, नाहन 6.7, सराहन
7.8, पांवटा साहिब 8.0, कसौली 8.5, नेरी 8.6 और देहरा गोपीपुर में 9.0 डिग्री
सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। जारी...
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कम से कम
मुख्यमंत्री के जिले में तो शिक्षक पूरे कर लेते
 मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू का जिला हमीरपुर ही जब शिक्षकों के
अभाव की प्रताड़ना झेल रहा है तो फिर पूरे हिमाचल के स्कूलों का क्या हाल होगा,
इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। यही नहीं हिमाचल में सरकारी स्कूल क्यों
दिन प्रतिदिन फेल होते जा रहे हैं इसके लिए भी हमीरपुर के स्कूल बड़ी मिसाल बनकर
प्रदेश के लोगों के सामने आए हैं। जहां छात्रों का जीवन अंधकार में जाता हुआ
प्रतीत होता है जबकि यहां की जनता ने हिमाचल को काबिल मुख्यमंत्री दिया है।
अब ग्रीष्मकालीन स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं बहुत कम समय बचा है लेकिन हिमाचल
के स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं।
हमीरपुर जिले के 67 प्राथमिक स्कूल एक-एक जेबीटी शिक्षक के सहारे ही चल रहे
हैं। अब इन स्कूलों में सभी विषयों की पढ़ाई कैसे होती होगी इसे बताया नहीं,
आसानी से समझा जा सकता है। पहले में इन स्कूलों में दो से तीन जेबीटी शिक्षक
कार्यरत थे, हलांकि वह भी अच्छी शिक्षा देने के लिए पर्याप्त नहीं थे। फिर भी
स्कूल रड़क-रड़क के चल रहे थे। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में स्कूलों के मर्ज होने
के बाद कुछ स्कूल अन्य स्कूलों में शिफ्ट हो गए है। इससे अब जिले के प्राथमिक
स्कूलों में स्टाफ की कमी चल रही है।
जारी...
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चिट्टे की शपथ
तैयार कर रहे थे, पुलिसवाला चिट्टा बेच रहा था
हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती में चयनित अभ्यार्थियों को
नियुक्ति पत्र तभी मिलेगा, जब वे न चिट्टा लूंगा न बेचूंगा का शपथ पत्र विभाग
को देंगे। हलांकि कि जिस दिन यह बात की जा रही थी तब भी पुलिस वाले चिट्टा
बेचते हुए पकड़े जा रहे थे। इससे पहले भी एक अधिकारी सहित 11 पुलिस वाले चिट्टे
के आरोप में पकड़े गए थे। अब प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी
दिशा-निर्देशों में चिट्टा न बेचने की शपथ जोड़ दी गई है।
सौ रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर शपथ पत्र लाना अनिवार्य किया गया
है। हिमाचल पुलिस में 1226 आरक्षियों की भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने को है। इन
सभी को यह शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। पुरुष आरक्षियों का प्रशिक्षण पीटीस
डरोह (कांगड़ा) और महिला आरक्षियों का प्रशिक्षण पीटीसी पंडोह (मंडी) में आयोजित
किया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि कुल 9 माह निर्धारित की गई है।
हलांकि पुलिस भर्ती के लिए चिट्टा न लूंगा और न बेचूंगा जैसा शपथ पत्र लेने की
कोई जरूरत नहीं थी। पुलिस नियम वैसे भी इससे ज्यादा कड़े हैं यदि उन सभी नियमों
का कड़ाई से पालन हो तो पुलिस कर्मियों द्वारा की जा रही अपराधिक गतिविधियों में
वैसे भी कमी आ सकती है। पुलिस के बड़े रैंक के
अधिकारी अपने समक्ष अधिकारियों पर चिट्टे के कारोबार में संलिप्त होने पर संदेह
जता चुके हैं। लेकिन उस पर कोई जांच नहीं हुई और नतीजा यह निकला कि पुलिस के
कुछ अधिकारी और कर्मचारी चिट्टा बेचने के आरोप गिरफ्तार हुए।
जारी...
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संपादकीय बदनाम एप्स्टीन
अमेरिका
की एप्स्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम आने से पूरे देश की
राजनीति में एक उबाल खड़ा हो गया है। जैफरी एप्स्टीन अमेरिका का वह बदनाम शक्स
था जिस पर छोटी उम्र की बच्चियों के यौवन शोषण का आरोप था और इसी प्रकार के
मामलों में उसे अमेरिका में सजा भी हुई और जेल में ही उसकी मौत हो गई थी।
अमेरिका में यौवन शोषण को एक बड़ा अपराध माना जाता है। अमेरिका के जस्टिस
डिपार्टमेंट ने एप्स्टीन की मौत के बाद उसकी फाइल में दर्ज नामों को उजागर करने
का फैसला किया। इस फाइल में दुनियां भर के नामी आदमियों के नाम उजागर हो रहे
हैं जिन पर छोटी बच्चियों के साथ यौवन शोषण करने के आरोप लगे हैं।
कहते हैं कि जैफरी एप्स्टीन की फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित
भारत के राजनेताओं, कलाकारों, उद्योगपतियों के नाम भी आ रहे हैं। अब यह तो नहीं
कहा जा सकता कि इनके संबंध बच्चियों के शोषण करने तक हैं। लेकिन इन फाइलों से
यह अंदेशा जताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एप्स्टीन के संपर्क
में थे। कुछ ई-मेलस के आधार पर प्रधानमंत्री का नाम एप्स्टीन फाइल से
जोड़ा जा रहा है। अब आगे जैसे जैसे खुलासे होंगे यह बात स्पष्ट होती जाएगी कि
प्रधानमंत्री कि कितनी घनिष्टता एप्स्टीन से थी या नहीं भी थी। फिलहाल
प्रधानमंत्री और कुछ अन्यों का नाम राजनैतिक क्षेत्र में खूब उछाला जा रहा है।
एप्स्टीन फाइल का दुनियां भर में असर यह हो रहा है कि जिस भी देश का नाम पक्की
तरह से एप्स्टीन फाइल्स में आ रहा है उसे उसके देश में अपने पद को छोड़कर भागना
पड़ रहा है।
....जारी |
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केवल गाली एससी एसटी एक्ट में अपराध
नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि
केवल अपमानजनक या गाली गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल अपने आप में अनुसूचित जाति (एससी)
एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा
सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस कानून के तहत अपराध के दायरे में आने के लिए यह
साबित होना चाहिए कि वह कृत्य किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित
करने के विशेष इरादे से किया गया हो। जस्टिस जेवी पारदीवाला और जस्टिस जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि केवल यह
तथ्य कि पीड़ित अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है, यह पर्याप्त नहीं है।
पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक अपीलकर्ता के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को
रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि न तो प्राथमिकी और न ही आरोपपत्र में यह आरोप
था कि अपीलकर्ता ने किसी जाति आधारित अपमान या धमकी का कृत्य किया। शीर्ष अदालत
पटना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया
था। आरोप था कि आंगनवाड़ी केंद्र में हुई एक घटना के दौरान शिकायतकर्ता (अनुसूचित
जाति) के साथ जातिसूचक गालियां दी गई और मारपीट की गई। अपीलकर्ता पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 341, 323, 504, 506, 34 तथा एससी/एसटी
कानून की धारा 3(1) (आर) और 3(1) (एस) के तहत आरोप लगाए गए थे।
जारी...
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नोबेल पुरस्कार न मिलने से ट्रंप
नाराज हो गए
नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिका
के राष्ट्रपति को न दिए जाने से वह नाराज हो गए हैं। इसके लिए उन्होंने एक
नाराजगी भरा पत्र भी नोबल शांति पुरस्कार देने वाली समिति तक पहुंचा दिया है।
अपनी आदत से मजबूर ट्रंप ने आगे के मंसूबे भी सार्वजनिक कर दिए हैं। फिलहाल
उन्होंने अपना फोकस ग्रीन लैंड की ओर मोड़ दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने की मुहिम को अब
नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ा है। ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री
जोनास गहर स्टोर को लिखे पत्र में धमकी भरे अंदाज में कहा कि आठ युद्ध रोकने पर
भी उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं दिया, इसलिए अब शांति के बारे में सोचने की उनकी
कोई जिम्मेदारी नहीं है। ट्रंप ने आगे कहा कि अब वह सिर्फ वही सोचेंगे, जो
अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहतर और उचित होगा। लीक हुआ यह पत्र अमेरिकी
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कर्मचारियों की ओर से कई यूरोपीय राजदूतों को भेजा
गया है। उनसे पत्र को राष्ट्राध्यक्षों के साथ साझा करने को भी कहा गया है। ट्रंप ने
पत्र की शुरुआत नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने को लेकर शिकायत से की है।
उन्होंने दावा किया कि नॉर्वे की ओर से उन्हें नोबेल न दिए जाने से वैश्विक
मामलों और गठबंधन की राजनीति के प्रति उनका दृष्टिकोण बदल गया है।उन्होंने
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।
नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की संसद की ओर से नियुक्त समिति की ओर से दिया
जाता है। जारी...
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हिमाचल विवि में खिलाडियों को 3 प्रतिशत आरक्षण
मिलेगा
प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रतिभावान खिलाड़ियों को बड़ा तोहफा दिया है।
विवि प्रशासन ने सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने वाले सभी पदों पर विशिष्ट
खिलाड़ियों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का आधिकारिक फैसला लिया है। यह
व्यवस्था ग्रुप-ए से लेकर ग्रुप-डी तक के सभी श्रेणी के पदों पर प्रभावी होगी। विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन अनुभाग ने कुछ दिन पहले इस संबंध में
अधिसूचना जारी कर दी है। विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय राज्य
सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के अनुरूप
लिया गया है। इनमें 28 मई 1999, 2 अगस्त 2008, 22 अक्तूबर 2018 और 12 नवंबर
2025 की अधिसूचनाएं शामिल हैं, जिनके तहत पहले से ही राज्य सेवाओं में
खिलाड़ियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। अब इन्हीं प्रावधानों को विवि
सेवाओं में भी अपनाया गया है। अधिसूचना के अनुसार खेल कोटा केवल सीधी भर्ती के
मामलों में ही लागू होगा। पदोन्नति में इस आरक्षण का लाभ नर्ही मिलेगा। साथ ही
खिलाड़ियों की पात्रता, खेल उपलब्धियों की मान्यता और प्रमाणपत्र से संबंधित सभी
शर्तें राज्य सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार ही होंगी। विवि ने इस आदेश की
प्रतिलिपि सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दी है, ताकि आने वाली
भर्तियों में इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
जारी...
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सोने चांदी की कीमतों में लगी आग
सोने और चांदी की कीमतों में आजकल आग लगी हुई है। कहते हैं डालर की
कीमत कम करने के चक्कर में कई देशों ने अपने सोने और चांदी के स्टाक को बढ़ाना
शुरू किया हुआ है। भारत भी इस प्रयास में है कि सोने के स्टाक को बढ़ाकर डालर को
और अधिक बढ़ने से रोका जाए। दिल्ली सराफा बाजार में चांदी एक दिन में 15,000 रुपये या 4.05 फीसदी महंगी
होकर 3.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई। हलांकि इसके तेजी
से गिरने की खबरें भी आने लगी हैं। दामों में प्रतिदिन हो रही हजारों रुपए की
वृद्धि से लोग परेशान है। सोना बढ़कर 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया
था। जिसमें अब फिर से गिरावट दर्ज की गई है। सराफा कारोबारियों ने कहा, वैश्विक
बाजारों में ताजा खरीदारी और अन्य मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डालर में कमजोरी
से सोन-चांदी की कीमतें रिकार्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। चांदी बढ़ी छलांग के
साथ 3.70 लाख रुपए पर पहुंच गई। चांदी में सोने से भी अधिक तेजी देखने को मिल
रही है। डालर के मुकाबले रुपया 92 के करीब पहुंच गया है। इससे पहले चांदी 2.87 लाख के करीब झूल रही थी। एमसीएक्स पर 15 दिसंबर 2025 के
आसपास चांदी पहली बार दो लाख रुपए पर पहुंची थी। चांदी को दो लाख से तीन लाख
रुपए तक पहुंचने में सिर्फ एक महीने का समय लगा। वहीं इसे एक से दो लाख तक
पहुंचने में नौ महीने...
जारी...
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सुभाष विरमानी के आने से शांडिल पर नकेल
सोलन में कम्प्यूटर फेल कर दिए हेराफेरी मास्टरों ने
सोलन नगर में रैपिडो सेवा और ऑटो रिक्शा वालों में ठनी
जारी... |
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शिमला में बर्फ में फिसलने से हड्डियां टूटी
कुछ ही समय में हिमाचल में इलेक्ट्रिकल टैक्सियां नजर आएंगी
'समर्थ पंचायत पोर्टल' से जुड़ेगे सभी ग्रामीण
जारी... |
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