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शिमला का 13 किलोमीटर लंबा रोप वे प्रोजेक्ट
खटाई में पड़ा
बहुचर्चित शिमला का रोप वे प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया है। इसकी लागत
लगभग डबल होने पर भारत सरकार से क्लियरेंस तो आ गई थी लेकिन अब उपमुख्यमंत्री
मुकेश अग्निहोत्री ने इस प्रोजेक्ट पर स्टेट शेयर को लेकर पहले वित्त विभाग से
गारंटी लेने को कहा है। इससे लगता है कि प्रदेश सरकार की इसमें सांसें फूल गई
हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है हिमाचल प्रदेश की आर्थिक कंगाली। इस प्रोजेक्ट को बाह्य वित्त पोषण के जरिए एनडीबी यानी ब्रिक्स बैंक फंड कर रहा
है लेकिन 80 और 20 फीसदी हिस्सेदारी के कारण राज्य सरकार पर जो लागत 388 करोड़
पुराने टेंडर से बन रही थी वह बढ़कर 540 करोड़ हो गई है। इसलिए उप मुख्यमंत्री
ने रोपवे ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन से कहा है कि वह पहले वित्त विभाग से स्टेट
शेयर पर गारंटी ले ले। वित्त विभाग के पास इस तरह के प्रोजेक्ट में पैसा देने
के लिए परिस्थितियों बनेंगी या नहीं, यह फाइल पर ही पता चलेगा। इस पर अंतिम
फैसला कैबिनेट में ही होगा। करीब 13.79 किलोमीटर लंबे इस रोपवे की लागत पहले 1556 करोड़ थी, जो अब बढ़कर
2980 करोड़ हो गई है। तीन बार टेंडर करने के बाद इसके लिए आस्ट्रिया की एक
कंपनी आगे आई थी। सिंगल टेंडर पर भारत सरकार की राय लेने के लिए हिमाचल सरकार
ने इसे वित्त विभाग के आर्थिक मामले विभाग को भेजा था।
जारी...
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हिमाचल की दवा कंपनियों को बंद
किया जाए
हिमाचल प्रदेश में बनने वाली दवा कंपनियों को बंद कर दिया जाए तो ही
अच्छा है। जब भी यहां बनी दवाओं की गुणवत्ता की जांच होती है तो बार बार इनके
सैंपल फेल हो जाते हैं। प्रदेश सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
एक बार फिर केंद्रीय औषधाि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और विभिन्न राज्य
दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं की जांच में देशभर की 141 दवाएं व अन्य हेल्थकेयर
उत्पाद गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में
निर्मित 47 दवाएं भी शामिल हैं, जो देश में सबसे अधािक हैं। इन दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, ऊना, परवाणू, काला अंब,
कांगड़ा और पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फार्मा इकाइयों में
हुआ था। यह खुलासा मार्च 2026 में जारी ड्रग अलर्ट में हुआ है जिसने प्रदेश के
फार्मा हब होने के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े
हो गए हैं। राज्य दवा नियंत्रक का वही प्रेस नोट नई तारीख के साथ बाहर आ गया है, जिसके कोई
मायने नहीं हैं। हिमाचल में निर्मित फेल हुई दवाइयों में अमोक्सिसिलिन व
पोटेशियम क्लेवुलानेट, डाइक्लोफेनाक, पैरासिटामोल व क्लोरजोक्साजोन, पोविडोन
आयोडीन सॉल्यूशन,
पैरासिटामोल, प्रो क्लोरपेराजीन क्लारपराज पेराजीन माउथ डिसॉल्विंग, ....
जारी...
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