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क्या भारत
अमेरिका का गुलाम हो चुका है
आज पूरा भारत ही नहीं पूरा विश्व इस बात को सोचने पर मजबूर हो चुका है
कि क्या भारत अमेरिका का गुलाम हो चुका है। भारत की गुलामी का इतिहास ऐसा ही
रहा है कि उसे किसी ने आक्रमण करके गुलाम नहीं बनाया उसने खुद गुलामी स्वीकार
की है।
जिस प्रकार भारतीय गणतंत्र की स्थापना से पहले ब्रिटिश संसद से भारत के लिए
आदेश आते थे उसी प्रकार अब आदेश अमेरिका से आने लगे हैं। अब जो आदेश अमेरिका के
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हैं वह उसका
निःसंकोच पालन करते हैं। ट्रंप ने कहा भारत रूस और ईरान से कच्चा तेल नहीं
खरीदेगा और भारत ने अपने परममित्रों से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया।
हाल ही में ईरान पर इजराइल अमेरिका युद्ध के दौरान ट्रंप ने कहा कि भारत एक माह
तक रूस से तेल खरीद सकता है तो भारत में कुछ सत्ताधारी लोगों ने इस पर जश्न मना
लिया। डोनाल्ड ट्रंप के आदेश अमेरिका में होते हैं और भारतीय नागरिकों को पकड़
कर बेड़ियों और जंजीरों में बांध कर भारत में छोड़ दिया जाता है। आपरेशन संदूर पर
ट्रंप सौ बार कह चुका है कि भारत ने युद्ध उसके कहने पर रोका।
क्या यह गुलामी के लक्ष्ण नहीं हैं कि ट्रंप भारत पर मनमर्जी से टैरिफ लगाएगा
और उसके देश की अदालत द्वारा टैरिफ को रद्द किए जाने के बावजूद वह भारत से
टैरिफ वसूल करेगा।
जारी...
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ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपने हाथ जला लिए
इजराइल के साथ ईरान पर युद्ध करके अमेरिका ने अपने हाथ जला लिए हैं।
इसे उनकी हार के रूप में ही देखा जाने लगा है। अब अमेरिका में ही यूएस
प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना शुरू हो गई हैं। वाशिंगटन से प्राप्त
समाचारों में कहा जा रहा है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध खत्म होने का नाम
नहीं ले रहा है। ईरान पर हमला करते वक्त अमेरिका ने सोचा भी नहीं था कि ये
युद्ध इतने दिन तक चलेगा और इतने अधिक अमेरिकी सैनिक इसमें मारे जाएंगे।
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई को मारने के बाद यूएस प्रेजिडेंट ट्रंप ने कहा
था कि ये लड़ाई ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी। ईरान के लोग अब आजाद हैं। उन्हें अब
नई सरकार चुनने की आजादी है, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्ट। खामनेई की शहदत के बाद
ईरान ने दुगनी गति से अमेरिकी ठिकानों को नेस्तानाबूद करना शुरू कर दिया। अब तो
भारी संख्या में अमेरिकी सैनिक इस युद्ध में मारे जाने लगे हैं। ईरान का भीष्ण
आक्रमण इजराइल और खाड़ी देशों पर जारी है। ट्रंप के अनुमान के अनुसार खामनेई की
मौत के बाद लोग भारी संख्या में सरकार बनाने के लिए सड़कों पर नहीं उतरे। उन्हें
अपने लीडर को खोने का दुख था। अब अमेरिका द्वारा ईरान की टॉप लीडरशिप की खात्मे
और रिजीम चेंज वाली पॉलिसी धरी की धरी रह गई है और अमेरिका की चिंता इस युद्ध
से पीछे हटने की हो गई है।
.जारी..
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अब मुख्यमंत्री
सुक्खू ने बाहरी राज्य की पुलिस को आड़े हाथों लिया
इस बार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बाहरी राज्यों से मुंह
उठाकर प्रदेश में घुसने वाली पुलिस को आड़े हाथों ले लिया। अब उन्होंने राज्य
विधानसभा में भी यह बात कही है। इससे पूरे देश में यह संदेश गया कि हिमाचल भी
भारतीय गणराज्य का एक सदस्य है और वहां रहने वाले नागरिकों की भी कोई संप्रभुता
है जिसकी रक्षा करने प्रदेश सरकार का भी एक कर्तव्य है।
जबकि इससे पहले विधायकों को उठाकर ले जाने वाले मामले में वह ऐसी कार्यवाही से
चूक गए थे। अब ताजा घटना में हुआ यूं था कि रोहडू के चिड़गांव के एक होटल से
बिना किसी पूर्व सूचना के युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने
के मामले में शिमला पुलिस ने दिल्ली के एसीपी समेत करीब 20 पुलिस कर्मियों को
नामजद कर लिया था। पहले पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ चिड़गांव थाने में एफआईआर दर्ज
की थी।
घटना के दिन सुबह करीब पांच बजे सादे कपड़ों में चिड़गांव के एक होटल में पहुंची
दिल्ली पुलिस की टीम यहां ठहरे युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को साथ ले गई
थी। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने आईएसबीटी शिमला, शोघी और सोलन के धर्मपुर में
नाकाबंदी कर दिल्ली पुलिस टीम को हिरासत में ले लिया।
जारी...
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परमवीर चक्र संजय
कुमार एक नई जंग के लिए तैयार
भारतीय सैन्य इतिहास के हीरोस में शामिल परमवीर
चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार नए संकल्प के साथ सेना से सेवानिवृत्त हो
गए हैं। अब वह हिमाचल में चिट्टे के खिलाफ चल रही जंग में शामिल होंगे और
युवाओं में देश सेवा का जज्बा पैदा करेंगे। उन्होंने लगभग 29 साल और 8 महीने तक
देश की सेवा की है।
सेवानिवृत्ति के बाद संजय कुमार एक नई जंग के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि
फौजी कभी रिटायर नहीं होता, सिर्फ कार्यक्षेत्र बदलता है। उनकी सेवानिवृत्ति के
बाद की योजना राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनका
अगला लक्ष्य भावी पीढ़ी को नशे के चिट्टे (सिंथेटिक नशा) के जहर से बचाना है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वह अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार के सैन्य सफर की शुरुआत कोलकाता में हुई थी।
इसके बाद उन्होंने श्रीनगर की चुनौतीपूर्ण वादियों में दो साल का कठिन कार्यकाल
पूरा किया। श्रीनगर से वह सीधे द्रास सेक्टर पहुंचे, जहां उन्होंने न केवल
अदम्य साहस दिखाया। बल्कि पाकिस्तानी घुसपैठियों को पस्त कर विजय प्राप्त की। जारी...
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शंकराचार्य बनाम योगी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ में टकराव दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हिन्दू कार्ड पर
ख्याति प्राप्त करने वाले ये दोनों संत इस कदर आक्रामक हो गए हैं कि योगी के
पक्षकार जहां अविमुक्तेश्वासनंद को शंकराचार्य मानने से इंकार कर रहे हैं वहीं
शंकराचार्य योगी को हिन्दूविरोध बताने में लगे हैं।
हालत इस कदर खराब हो चुके हैं कि शंकराचार्य पर बच्चों के योन शोषण का आरोप तक
शंकराचार्य विरोधी लोगों ने लगा दिया। फिलहाल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन
उत्पीड़न केस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर
रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत की याचिका पर
सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि फैसला
आने तक कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। शंकराचार्य को जांच में सहयोग करने को कहा
गया। अदालत में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा। इससे शंकराचार्य
समर्थकों में योगी सरकार के खिलाफ भारी रोष है।
अब 11 मार्च के बाद शंकराचार्य ने लखनऊ योगी के खिलाफ प्रदर्शन कर एलान कर दिया
है कि जिसके राज में गौ मांस की सबसे ज्यादा बिक्री होती है, जिससे उनकी पार्टी
चंदा लेती है वह कैसे हिन्दू हो सकता है।
जारी...
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शराब घोटाले में बरी होने के बाद केजरीवाल तीखे तेवर में
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब
से शराब घोटाले में बरी हुए हैं तब से वह फिर से तीखे तेवरों में आ गए हैं। भले
ही इस केस की वजह से वह अपनी दिल्ली की अभेद्य सरकार को बीजेपी के हाथों हार गए
हों लेकिन अब उनके समक्ष पंजाब में अपनी सरकार को बचाने और गुजरात में सरकार
बनाने की चुनौती है। राजनैतिक पंडित इस रिहाई को भाजपा के लिए कम और कांग्रेस
के लिए अधिक नुक्सानदायक रहने के नजरिए से भी देख रहे हैं।
पिछले दिनों दिल्ली की विशेष अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी घोटाले
में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष
सिसोदिया और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता और 20 अन्य लोगों को बरी कर
दिया। अदालत ने कहा कि गंभीर संदेह तो दूर की बात है इसमें तो प्रथमदृष्टया
मामला भी नहीं बनता। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते
हुए कहा कि यह मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह विफल और निराधार साबित हुआ है।
हलांकि इसफेसले के खिलाफ एक अपील हाई कोर्ट में लंबित चल रही है।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने कहा ऐसा लगता है कि जांच
पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति बनाने या कार्यान्वयन से जुड़े
लगभग हर व्यक्ति को फंसाया गया है। जारी...
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बिहार से उठा
एसआईआर का बवाल हिमाचल पहुंचने वाला है
बिहार से उठा एसआईआर का बवाल अब हिमाचल प्रदेश पहुंचने वाला है। हलांकि
हिमाचल में उस प्रकार की बाधाएं आने की कम संभावनाएं हैं जैसी बिहार और कुछ और
राज्यों में बनी हुई हैं। अनुमान लगाया जा रहा है हिमाचल में भी लाखों वोट
मतदाता सूची से कट जाएंगे। लेकिन जिन लोगों के वोट गलत ढंग से कटेंगे वह फिर से
शामिल किए जा सकेंगे क्योंकि हिमाचल एक छोटा राज्य है और पोलिंग बूथ भी छोटे
छोटे हैं। लोग आसानी से अधिकारियों से संपर्क कर अपने वोट को ठीक करवा लेंगे।
पिछले दिनों चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश सहित 22 राज्यों और केंद्र शासित
प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग
के सचिव ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लेटर लिखकर एसआईआर से
जुड़ी तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा है। एसआईआर प्रक्रिया
अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने पहले फेज में बिहार में
एसआईआर करवाया था। जिस पर बड़ा बवाल खड़ा हुआ था। दूसरे फेज के तहत 12 राज्यों
में एसआईआर जारी है।
एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसके
दायरे में आ जाएंगे।
आयोग ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र,
मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना
और उत्तराखंड के मुख्यनिर्वाचन अधिकारियों
को लिखकर तैयारी पूरी करने
को कहा है।
जारी...
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अब एनसीटीई ने
मंडी कॉलेज बीएड की मान्यता रद्द की
राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से हिमाचल सरकार को फिर एक
झटका लगा है। न जाने मुख्यमंत्री खुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश में किस प्रकार
का शिक्षा तंत्र खड़ा करना चाह रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े वल्लभ गवर्नमेंट
कॉलेज मंडी के बीएड कार्यक्रम की मान्यता समाप्त कर दी है। इतने वर्ष हो गए
लेकिन प्रदेश सरकार ने कभी भी एनसीटीई के नियमों को महत्व नहीं दिया।
एनसीटीई के नियमों को नजरअंदाज करने का खमियाजा प्रदेश के युवा भुगत रहे हैं।
प्रदेश सरकार पिछले दो दशकों से एनसीटीई के दिशानिर्देश पर कोई ठोस समाधान नहीं
निकाल पाई है। अब तो हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज
के बीएड कार्यक्रम में चल रही दो इकाइयों जिनमें 100-100 सीटें हैं की मान्यता
समाप्त होने की स्थिति पूर्णतः स्पष्ट हो गई है। इससे पहले प्रदेश सरकार ने
एनटीटी टीचर भर्ती में भी एनसीटीई के नियमों को गच्चा देने का प्रयास करते हुए
नए टीचर भर्ती करने का प्रयास किया।
प्रदेश सरकार ने चोर दरवाजे से जितने भी अध्यापकों को भर्ती की है वह सिर्फ
एनटीटीई को धोखा देने के मकसद सी ही की गई है। अब जो झटके पर झटके प्रदेश सरकार
को लग रहे हैं उससे अब तो सरकार को एनसीटीई को गंभीरता से लेना शुरू कर देना
चाहिए ताकि शिक्षा जगत से जुड़ने का स्वपन पाले युवाओं के साथ कोई धोखा न हो और
स्कूली बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
जारी...
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संपादकीय
विपक्ष की जीत का इंतजार
भारतीय
लोकतंत्र अब इस दौर में आ खड़ा हुआ है कि विपक्ष की जीत को ही अब लोकतंत्र माना
जा सकता है। भाजपा पर अब यह इल्जाम और गहरा हो गया है कि वह वोट चोरी करके
चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए भाजपा को चुनाव जीताने में मदद
करता है। यही वजह है कि अब लोग इस बात पर नजर रखने लगे हैं कि देश के किस
हिस्से में भाजपा चुनाव हारती है। निकट भविष्य में अब पश्चिम बंगाल के चुनाव
हैं और यहां भी यही माना जा रहा है कि यहां भाजपा उन्हीं पैंतरों से सरकार बना
लेगी जैसे उन्होंने हरियाणा के बाद अपनी जीत का क्रम जारी रखा हुआ है।
बंगाल में चुनाव बहुमत के लिए नहीं हो रहा है। यहां के चुनाव में यही देखा जाना
बाकि है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी चुनावी हेराफेरी मास्टरों से निपटने में
सफल हो पाती है या नहीं। ऐसा तभी संभव हो सकता है जब पूरा बंगाल ममता बनर्जी के
पक्ष में एक तरफा मतदान करने पर उतर जाए और हेराफेरी के वोट को एक तरफा मतदान
को मात न दे सकें। बंगाल में ममता के लंबे शासनकाल के कारण ब्यूरोक्रेसी और
सरकारी कर्मचारियों पर ममता बनर्जी के कब्जे में हैं और यही चुनाव आयोग की
हेराफेरी के आरोपों को पलट सकते हैं। यही देखना बकि रह गया है कि बंगाल में
विपक्ष जीतता है या केन्द्र की सत्ता।
बंगाल से ज्यादा चरचा अब उत्तर प्रदेश की होने लगी है। यहां भी एसआईआर का
जिन बाहर निकल चुनाव है।
....जारी |
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खालिदा का पुत्र तारिक बांग्लादेश का
प्रधानमंत्री
बांग्लादेश में पूर्व
प्रधानमंत्री खालिदा जिया का पुत्र तारिक रहमान प्रधानमंत्री की कुर्सी तक
पहुंच गया है। उसी के नेतृत्व में बीस साल बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)
की सरकार बन रही है। 297 सीटों के घोषित नतीजों में बीएनपी और उसके सहयोगियों
को 212 सीटें मिली हैं। इस चुनाव में पूर्व पीएम बेगम खालिदा जिया के बेटे
तारिक प्रधानमंत्री बन रहे हैं।
बांग्लादेश में 1991 के बाद से कोई पुरुष लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर
प्रधानमंत्री नर्ही बन पाया था। दो महिलाओं खालिदा जिया व शेख हसीना के बीच ही
प्रधानमंत्री का पद बदलता रहा। बंग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना को
भारत ने शरण दी है। बीच-बीच में कार्यवाहक सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में
जरूर पुरुषों को सरकार चलाने का मौका मिला। अब 35 साल बाद बेगम जिया के बेटे
तारिक रहमान इस पद पर काबिज होंगे।
रहमान दुनियां के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो गए हैं जिनके माता-पिता दोनों
देश के शासक रह चुके हैं। रहमान के पिता जनरल जियाउर रहमान सितंबर, 1976 से मई,
1981 तक पहले बतौर मुख्य मार्शल प्रशासक और फिर बतौर राष्ट्रपति बांग्लादेश के
शासक रहे थे। उनकी मां खालिदा जिया ने 1991-96 और 2001-06 तक बतौर प्रधानमंत्री
देश का शासन संभाला।
बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77, जबकि
पार्टी को अकेले 68 सीटें मिली हैं।
जारी...
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पेंपा सेरिंग फिर
चुने गए तिब्बत के प्रधानमंत्री
पेंपा
सेरिंग को दूसरी बार तिब्बत की निर्वासित सरकार चलाने का मौका मिलेगा। पहले चरण
के मतदान में ही उन्हें सिक्योंग चुन लिया गया है। सिक्योंग एवं राजनीतिक नेता,
निर्वासित तिब्बत सरकार में प्रधानमंत्री के बराबर का पद है। केंद्रीय तिब्बती
प्रशासन के चुनाव आयोग ने मैक्लोडगंज में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सिक्योंग
व 18वें तिब्बती संसद-इन-एग्जाइल के सदस्य के लिए प्रारंभिक चुनाव के परिणामों
की घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त लोबसांग येशी ने घोषणा की कि नियमों व
विनियमों के अनुच्छेद 67 (4) के तहत यदि किसी प्रत्याशी को प्रारंभिक चुनाव में
कुल मतों का 60 फीसदी से अधिक प्राप्त होता है, तो अंतिम दौर का चुनाव नहीं
होगा और वह उम्मीदवार सिक्योंग के रूप में निर्वाचित घोषित होगा। इन्हीं नियमों
के अनुसार पेंपा सेरिंग को सिक्योंग के रूप में निर्वाचित घोषित किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार एक फरवरी को हुए पहले चरण के मतदान में कुल 51,140
तिब्बतियों ने चुनाव में मतदान किया। इसमें कुल 103 बोन धर्म के चार स्कूलों से
6 उम्मीदवार, उत्तर-दक्षिण अमेरिका, यूरोप-अफ्रीका से 6-6 उम्मीदवार और
ऑस्ट्रेलिया (भारत, नेपाल और भूटान को छोड़कर) से 3 उम्मीदवार शामिल थे। 18वें
तिब्बती संसद-इन-एग्जाइल का 26 अप्रैल को सांसदों के 45 पदों लिए मतदान का
मुख्य चरण होगा।
जारी...
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मुख्यमंत्री ने
बजट को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाला बताया
मुख्यमंत्री
सुखविंदर सिंह सुक्खू वार्षिक बजट को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का दावा किया
है। वह कहते हैं कि राज्य की आर्थिक दिशा को नई पहचान देने के उद्देश्य से वर्ष
2026-27 के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास की धुरी के रूप में स्थापित
किया है। मुख्यमंत्री ने कहते हैं कि राज्य को वर्ष 2030 तक आत्मनिर्भर बनाना
उनकी सरकार की प्राथमिकता है। वास्तविक प्रगति अंतिम व्यक्ति की समृद्धि से
मापी जाती है। सरकार केवल अनुदान नहीं दे रही, बल्कि ऐसा पारिस्थिति का तंत्र
तैयार कर रही है, जहां ग्रामीण युवा कृषि और डेयरी को सम्मानजनक एवं लाभकारी
व्यवसाय के रूप में अपनाए। स्वयं उन्होंने अपनी 50 प्रतिशत वेतन राशि अगले छह
महीनों तक स्थगित करने का निर्णय लिया है। मंत्रियों और विधायकों ने भी क्रमशः
30 प्रतिशत और 20 प्रतिशत वेतन स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ
राज्य के एक लाख जरूरतमंद परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्थायी आवास
प्रदान किया जाएगा। सरकार ने में गाय के दूध की खरीद मूल्य को 51 रुपए से बढ़ाकर
61 रुपए प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपए से बढ़ाकर 71 रुपए प्रति
लीटर किया गया है।
जारी...
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सोलन के दवा उद्योग पर
जंग का असर
हिमाचल
प्रदेश के सोलन जिला में स्थापित दवा उद्योगों का रॉ मटीरियल अधिकतर चीन से आता
है। खाड़ी में चल रहे युद्ध का दवा उद्योग पर सीधा असर भले ही न पड़ा हो, लेकिन
इस माहौल की आड़ में दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों
में अचानक भारी बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इसलिए यहां इसका बड़ा असर हुआ है। इस कारण
सैकड़ों दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। अधिकांश
फार्मा रॉ मटीरियल चीन से आयात होता है और वहां के सप्लायर मौजूदा वैश्विक
परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतों में मनमाना इजाफा कर रहे हैं। उद्योग से
जुड़े सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय में कई महत्त्वपूर्ण दवा रसायनों की
कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है। दर्द निवारक दवाओं में इस्तेमाल होने वाला
एक्लोफेनैक 935 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 980 रुपए तक पहुंच गया है। आमतौर
पर सबसे अधिक उपयोग में आने वाली दवा पैरासिटामोल की कीमत 255 रुपए से बढ़कर 380
रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी तरह मांसपेशियों के दर्द की दवाओं
में प्रयुक्त क्लोरोक्साजोन की कीमत 710 रुपए से बढ़कर 880 रुपए प्रति किलोग्राम
हो गई है। दवा निर्माण में उपयोग होने वाले अन्य रसायनों की कीमतों में भी
बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (आईपीए) 124 रुपए से बढ़कर 180 रुपए
प्रति किलोग्राम हो गया है......
जारी...
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सबसे पहले सोलन जिला में ढह जाएगी कांग्रेस
सोलन का चेस्टर हिल्स जमीन विवाद के घेरे में
हिमाचल में एंट्री टैक्स के विरोध में उतरे निजी बस ऑपरेटर
जारी... |
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लोगों की जेब कतरने का नया विकल्प
शिक्षा की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा से पीछे हटती जा रही
सरकार
चिट्टा बेचने में पुलिस आगे
जारी... |
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