1st Choice of Indian Politicians

हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

SANJAY HINDWAN   Editor

 

Saproon, Solan, Himachal Pradesh- 173211 (INDIA) Contact : +91 94181 04770

संपादकीय

संपर्क करें

विज्ञापन दरें

Old Edition

2nd Last Edition

 

Website of GRAS

     Gras is now a well known political weekly news paper of INDIA. People all over the world are visiting on our website regularly. This site was launched on 26th Jan. 2009 for the purpose of that more peoples of INDIA should know about our Constitution to built the Nation more strong. We got strong queries on our reporting. Now we are getting good response from our readers all over the world.

 

 आप पोस्‍ट आफिस के खाता IPPB 019110001699 (IFSC Code No. IPOS 0000001) में 300 रुपए जमा करवाकर भी ग्रास पत्रिका के नियमित ग्राहक बन सकते हैं। इस शुल्‍क में आपको 52 संस्‍करण डाक द्वारा भारत वर्ष के किसी भी कोने में भेजे जाएंगे। अपना नाम व पता 9418104770 पर whatsapp & SMS करके भी भेज सकते हैं।

 

 

ज्ञानेश कुमार का इस्‍तीफा क्‍यों जरूरी

     आज भारत वर्ष की सड़कों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर बवाल खड़ा हुआ है। बहुत से लोगों का मत है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों जरूरी है। इस्तीफा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का होना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ही ज्ञानेश कुमार को इस पद पर बिठाया है। यहां यह समझना भी जरूरी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्ञानेश कुमार को बाद में बिठाया है। उससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाया है। ज्ञानेश कुमार की गलती इतनी भर है कि कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने लोकतंत्र को चुराना ही शुरू नहीं किया बल्कि ऐसी व्यवस्था की ओर देश को धकेल दिया जहां किसी दूसरे के जीतने की संभावनाएं ही खत्म हो जाएं। ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने एसआईआर के जरिए ऐसे मतदातों को ही मतदाता सूची में रखने का की तिकड़म शुरू कर दी कि जो सरकार के पक्ष में ही वोट करती रहे। इस बात का खुलासा कई राजनैतिक दलों ने पहले भी किया लेकिन जब इसके परिणाम हरियाणा, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सामने आए तो ज्ञानेश की कथित चोरी पकड़ी गई। इस चोरी को समझने में लोगों का शक तब और बढ़ गया जब निर्वाचन आयोग ने विपक्षी पार्टियों के आरोपों का जवाब देना बंद कर दिया। धीरे धीरे यह मामला इतना गंभीर हो गया कि भाजपा को छोड़, पूरा देश सड़कों पर उतर गया। ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे को लोकतंत्र की हत्या करने से इसलिए जोड़ दिया गया क्योंकि मौजूदा दौर में वहीं मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर बैठकर मनमानी कर रहे थे।      जारी...

 

प्रदेश को जल्‍द मिलेगा मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त

     ग्रास साप्ताहिक में खबर प्रकाशित होने के अगले दिन ही प्रदेश सरकार ने राज्य सूचना आयोग के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। काफी समय से बंद पड़े सूचना आयोग के लिए प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग ने हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति के लिए नए आवेदन आमंत्रित कर लिए। बताया जा रहा है कि आवेदन प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू हो गई है और इच्छुक पात्र अभ्यर्थी 29 अक्तूबर रात 11.59 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। विभाग के अनुसार इन पदों के लिए ऐसे व्यक्ति पात्र होंगे, जो सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित हों और जिन्हें विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार माध्यम अथवा प्रशासन एवं शासन के क्षेत्र में व्यापक ज्ञान और अनुभव प्राप्त हो। राज्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा। इनमें से जो भी पहले होगा, उसी के आधार पर कार्यकाल समाप्त माना जाएगा। आवेदन सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार, कमरा संख्या 201 या ए-203, आर्म्सडेल भवन, हिमाचल प्रदेश सचिवालय, शिमला-2 के नाम संबोधित किए जा सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार की यह कार्यवाही किसी मुकाम तक पहुंच पाएगी या पहले की तरह टांय-टांय फिस हो जाएगी।          जारी...

 

पटाखे बैन करना मुश्किल

    सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर बैन हटाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाना मुमकिन नहीं है। पूरी पाबंदी से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। हालांकि 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दी जा सकती है। पटाखे चलाने के लिए समय तय करना होगा जिससे कि त्योहार भी मनाया जा सके और लोगों को परेशानी भी न हो। जस्टिस एमएम सुंदरैश और पीबी वराले की बैंच ने कहा कि धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बैंच ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पटाखों के बेरियम की जांच, डेसिबल लेवल तय करने और फायर टेस्ट के लिए समय भी दिया है। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एक नोट पेश किया। इसमें कुछ खास ‘नेक्स्ट जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स’ को सीमित और शर्तों के साथ छूट देने पर विचार की बात कही गई। इन पटाखों को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से विकसित किया गया है।          जारी...

 

तिरंगा फहराने पर जमानत

     तिरंगा फहराने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को अदालत से जमानत लेकर जेल से बाहर आना पड़ा। यह घटना भी स्वतंत्र भारत के इतिहास में दर्ज हो गई है। इससे पहले कहते हैं करीब पांच दशक पहले कुछ युवाओं ने नागपुर आरएसएस के कार्यालय में तिरंगा फहरा दिया था और उन पर केस दर्ज हो गया था। अब आंदोलनकारी सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने प्रतिबंधित किए गए क्षेत्र में तिरंगा फहराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। आठ दिन बाद दिल्ली की स्पेशल कोर्ट से उन्हें जमानत मिली है। अदालत में दिल्ली पुलिस ने दोनों की तीन दिन के लिए कस्टडी मांगी थी लेकिन कोर्ट ने उनकी यह मांग ठुकरा दी। दोनों को 13 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। आठ से दस सीजेपी समर्थकों के साथ दोनों नेता तिरंगा लेकर वहां पहुंचे थे। दरअसल, 12 अक्तूबर को सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 13 अक्तूबर को दोनों नेता तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए। शांति नियम तोड़ने के आरोप में उन्हें पांच दिन के लिए जेल भेजा गया था। फिर 19 अक्तूबर को हाई कोर्ट ने मामले में दखल से इन्कार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि नेता पहले मजिस्ट्रेट का फैसला आने दें, फिर जरूरत पड़ने पर ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएं। उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी।                जारी...

 

हिमाचल के सभी जिलों को बराबर लाने का प्रयास शुरू

    हिमाचल के सभी जिलों को बराबर करने की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मकसद को पूरा करने के लिए हिमाचल में पांच नए जिलों का गठन करने की तैयारी शुरू कर दी है। हिमाचल में सबसे बड़ा जिला कांगड़ा है। जाहिर है कि इसे बराबर करने की कसरत इस कड़ी में की जाएगी। इसी प्रकार शिमला और मंडी में भी नए जिले बनाए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। अब सरकार ने इसके लिए एक आयोग गठित किया है। आयोग को छह माह में रिपोर्ट देनी होगी। इस कार्य में जनप्रतिनिधियों और लोगों से भी सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी को आयोग का अध्यक्ष बनाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल पंवर, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य होंगे। निदेशक भू-अभिलेख विभाग को आयोग का सदस्य सचिव बनाया है। आईएएस अधिकारी तोरुल एस रवीश निदेशक का कार्यभार देख रही हैं। विभागीय समन्वय और विषयगत विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने राजस्व, वित्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, लोक निर्माण, जलशक्ति और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक सचिवों को विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल करने की व्यवस्था की है। नए जिला बनाने का कार्य कोई आसान कार्य नहीं है।         जारी...

 

स्‍कूल के लिए दान में दी गई जमीन वापस लेने में लगे लोग

     स्कूल खोलने के लिए दान में दी गई जमीन अब असली मालिकों ने वापस लेनी शुरू कर दी है। यह खबर ग्रास साप्ताहिक ने उस समय प्रकाशित की थी जब प्रदेश सरकार ने कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की घोषणा की थी। अब इस मामले में बड़ा उफान आ चुका है। सरकार के हाथों से करोड़ों रुपए की वह जमीनें अपने असली मालिकों के पास वापस चली जाएंगी जिन्हें स्कूल खोलने के मकसद से दान में लिया गया था। हिमाचल प्रदेश में कम छात्र संख्या और शून्य नामांकन के चलते करीब 1500 सरकारी स्कूलों को बंद किया जा चुका है। शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करवाने के मकसद से जमीन देने वाले कुछ परिवारों ने अब स्कूल बंद होने के बाद अपनी पुश्तैनी संपत्ति वापस मांगनी शुरू कर दी है। कुछ मामलों के हाईकोर्ट पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में ऐसे स्कूलों का रिकार्ड जुटाना शुरू कर दिया है। विभाग ने अधिकारियों से जमीन के दानपत्र, राजस्व रिकार्ड और मालिकाना हक से जुड़ी जानकारी निर्धारित प्रारूप में मांगनी शुरू कर दी है। एक जानकारी के अनुसार शिमला के गोकारसवारी गांव का मामला इस विवाद की चरचा में आ गया है। यहां करीब 50 वर्ष पहले सरकारी स्कूल के लिए जमीन दान में दी गई थी। रतन सैन बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में हाईकोर्ट ने जमीन मालिक के पक्ष में फैसला भी सुनाया दिया है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनके दादा ने गांव में सरकारी स्कूल चलाने के उद्देश्य से जमीन दी थी। स्कूल बंद होने के बाद जमीन दान करने का मूल उद्देश्य समाप्त हो गया है।            जारी...

 

हिमाचल में फेल होती जा रही हैं इलेक्‍ट्रिकल बसें

    अभी हाल ही में एचआरटीसी के बेड़े में 296 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसें चलाने से पहले सरकार ने हिमाचल प्रदेश की वस्तुस्थिति का ठीक से आंकलन नहीं किया। हिमाचल जो पहाड़ी प्रदेश है और यहां की सड़कें एक वर्ष तक भी ठीक नहीं रह पाती हैं वहां के लिए सरकार ने बजट का विशेष प्रावधान किए बिना इलेक्ट्रिक बसें दौड़ाने का सपना पाल और डंके की चोट पर घोषणा कर दी कि हिमाचल शीघ्र हरित प्रदेश बनाने जा रहा है। जबकि पिछले कुछ वर्षों में यहां पेड़ों का कटान बड़ी बेदर्दी के साथ किया गया है। मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री ने अपनी छवि चमकाने के लिए अपने क्षेत्र में सबसे अधिक बसें ले ली। प्रतिस्पर्धा में अपने आपको आगे रखने वाले नेता विक्रमादित्य सिंह भी पीछे नहीं रहे उन्होंने भी शिमला ग्रामीण के लिए 25 बसें अपने क्षेत्र के लिए लगवा ली। अब नई आफत यह सामने आ गई कि चार्जिंग स्टेशन नहीं, तो रूट पर नहीं जाएंगी बसें। इससे सारा ढांचा गड़बड़ा गया। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में सबसे अहम चार्जिंग सुविधा है, जो शायद गिने चुने स्थानों पर ही है। साथ ही सड़कें इन नाझुक बसों को चलाने के काबिल ही नहीं हैं। अब पता चला है कि प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में तक चार्जिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो पाए हैं, जबकि यह काम सबसे पहले किया जाना चाहिए था। ऐसे क्षेत्रों में फिलहाल इन बसों को नहीं भेजा जा रहा है, जहां चार्जिंग सुविधा नहीं है। बस अड्डों और स्टेशनों पर चार्जिंग प्वाइंट की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण संचालन में व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आ रही हैं।          जारी...

 

कैप्‍टन स्मित मच्‍छार ने बचाई 174 लोगों की जान

    पिछले दिनों भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस बहादुरी का परिचय दिया उससे पूरा विश्व उनका कायल हो गया है। आतंकवाद से प्रेरित इस घटना के बारे में बताया गया है कि कैप्टन स्मित पर कथित तौर पर उनके सह-पायलट ने चाकू से हमला करने उन्हें बुरी तरह से घायल कर दिया था। फिर भी उन्होंने अपने जहाज को सफलतापूर्वक लैंडिंग करवाकर विमान में बैठे 174 लोगों की जान बचा ली। सह-पायलट को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया और उससे पूछताछ की जा रही है। दुबई से प्राप्त समाचारों में बताया गया है कि 30 सितंबर को दुबई-तेल अवीव उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने वाले फ्लाईदुबई के सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हमामी के रूप में हुई है। अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-हमामी के पिता ओमान के हैं और उसकी मां सीरिया मूल की हैं। अब तक की जांच में उसके अल कायदा की विचारधारा से प्रभावित होने के सबूत मिले हैं। पूछताछ में अल-हमामी ने बताया कि वह विमान को इजरायल में क्रैश कराना चाहता था। हमले से पहले भी उसके रवैये पर सवाल उठे थे। 2024 में उसे कट्टरपंथी सोच के कारण ओमान की नेशनल एयरलाइन की पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। बाद में उसे एयरलाइन में दूसरी जिम्मेदारी दी गई। करीब आठ महीने पहले वह फ्लाईदुबई से जुड़ा था। एक सूत्र ने बताया कि ओमानी अधिकारियों ने आरोपी का कबूलनामा इजरायल में प्लेन क्रैश करने की थी योजना कट्टरपंथी सोच के चलते ओमान एयर से निकाला सह-पायलट के कट्टरपंथी विचारों की पुष्टि की थी।।             जारी...

 

संपादकीय         अब पुलिस की ताकत बची है

     देश भर में चल रहे चुनाव सुधार आंदोलन में केन्द्र की मोदी सरकार ने पूरे तंत्र की ताकत पर तो अपने विरोधियों को काबू में रखा है। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर उतरे आंदोलन को नियंत्रण में रखने के लिए अब मोदी सरकार के पास पुलिस का ही सहारा रह गया है। संविधान की ताकत पर बने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से आंदोलनकारियों का विश्वास हट चुका है, ऐसे बयान कई तरफ से आए हैं। अब सड़कों पर उतरी जनता को सिर्फ पुलिस के सहारे काबू करके लंबे समय तक काबू रखना मुश्किल लगने लगा है।
     अब नवंबर माह में देश भर में केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलनों की झड़ी लगने की घोषणाएं हो चुकी है। नवंबर माह के शुरू में ही कांग्रेस ने रामलीला मैदान में बड़े आंदोलन की घोषणा की है। उसके बाद भारतीय किसान यूनियन ने भी दिल्ली में बड़े आंदोलन करने का बिगुल फूंक दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने भी अपने स्तर पर मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन करने की बात कही है। टेªड यूनियनों, छात्र संगठनों मजदूर संगठनों ने भी भारत में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए छोटे बड़े आंदोलनों की बात कही है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक देश के हर कोने से आंदोलन की बात कही जाने लगी है।
       
....जारी

 

ज्ञानेश के समर्थन में उतरे 42 जजों की झंड फिरी

     जिस नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश के छात्रों में उबाल मचा हुआ है। इस मामले को लेकर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक हो चुका है। अब यह नीट पेपर लीक का मामला जेन-जी का बड़ा आंदोलन बन चुका है। अब इस मामले में अदालती कार्यवाही भी शुरू हो गई है। सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में जांच करके कुछ तथ्य अदालत के सामने रखे हैं। अब बताया जा रहा है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी। नीट के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान ही सवाल याद कर लिए थे। सीबीआई ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट में यह दावा किया है। देश भर में लोगों को इस बात को जानने की जिज्ञासा है कि नीट पेपर लीक के पीठे कौन कौन लोग थे। यह मामला छात्रों के लिए आफत कैसे बन गया। सीबीआई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आने का दावा किया है। 94 पेज की चार्जशीट में एजेंसी ने कहा है कि एनटीए के गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों की जांच और तलाशी की व्यवस्था नहीं थी। यहां तक कि इस सेक्शन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग लाइव-फीड सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था। चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई थी। इसकी जानकारी पिछले दिनों सामने आई है। इसके मुताबिक, एक्सपर्ट्स एनटीए ऑफिस से होटल लौटकर याद किए गए सवाल पर्चियों पर लिखते थे।         जारी...

 

हिमाचल प्रदेश में कड़ाके की ठंड शुरू हुई

    हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी और कई जिलों में बारिश से कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। लाहौल-स्पीति के केलांग में न्यूनतम तापमान शून्य से 1.7 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान में पांच से 15 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे पहुंचने के कारण पाला पड़ने और ठंड बढ़ने की आशंका बनी हुई है। सुबह-शाम बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटक स्थानीय मौसम एवं सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही रवाना हो रहे हैं। क्षेत्र के किसान और बागवान भी मौसम की अंगड़ाई पर नजर रखे हुए हैं। तापमान में गिरावट से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाना उनके लिए बड़ी चुनौती है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दिनों कुल्लू जिले के कोठी में 26.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। चंबा के जोत और मंडी के पंडोह में 20-20 मिलीमीटर, जबकि कुकुमसेरी में 18.5 मिलीमीटर बारिश हुई। मनाली में 17 मिलीमीटर बारिश हुई। पालमपुर में 8.6 मिलीमीटर, धर्मशाला में पांच मिलीमीटर, भुंतर में 3.9 मिलीमीटर और मंडी में 1.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।          जारी...

 

स्‍वर्ण कारोबारियों की सांसें फूल गई इन नवरात्रों में

     पितृपक्ष समाप्त होते ही सोलन के बाजारों में स्वर्ण कारोबार की धूम उठनी शुरू हो जाती थी। कई स्वर्णकार नवरात्र के पहले दिन से ही ग्राहकों के लिए बड़े गिफ्ट कूपन की घोषणाएं कर देते थे। लेकिन इस बार लगता है सोलन के स्वर्ण कारोबारियों की सांसें फूल गई हैं। इस बार नगर के स्वर्ण बाजार में वह रौनक देखने को नहीं मिल रही है जैसी पिछले वर्षों में देखने को मिलते थी। स्वर्ण आभूषण के शोरूमस को ऐसे सजाया जाता था जैसे वहां कोई विवाह का उत्सव चल रहा हो। प्राप्त समाचार में सिर्फ भूषण ज्यूलर्स ही अपने ग्राहकोें के लिए कुछ गिफ्टों की घोषणा के साथ मैदान में उतरे हैं। हलांकि सोने के दाम आसमान को छूने के बावजूद सोलन नगर में असभूषणों के शो रूमस खुलने में कोई कमी नहीं आई है। सोलन में कुछ ऐसे आभूषण विक्रेताओं ने दस्तक दी है जिनके कॉरपोरेट आफिस दूसरे राज्यों के शहरों में हैं। इसलिए सोलन के ग्राहकों को वह ऐसा प्रलोभन नहीं दे पाए हैं कि स्थानीय और प्रदेश के ग्राहक उनकी ओर आकर्षित हों। सोना एक ऐसी कीमती वस्तु है जिसकी खरीददारी के लिए लोग दूर दूर तक अच्छी दुकान की तलाश करते हैं। सोने के खरीददार सोने के भाव में प्रतिदिन होने वाली उछलकूद से भी परेशान हैं। किसी दिन सोने के भाव चार पांच हजार रुपए बढ़ जाते हैं तो कभी चार पांच हजार रुपए कम हो जाते हैं। इससे ग्राहक इंतजार ही करते रह जाते हैं कि सोने के भाव कब कम होगे और वह सोना खरीदने बाजार में जाएंगे।           जारी...

 

औद्योगिक प्रोत्‍साहन नीति की अवधि समाप्‍त, फैक्‍टरियों में चिंता

     हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक नीति से राहत मिलने की अवधि 11 अक्तूबर 2026 को समाप्त हो गई है। इससे उद्योगपतियों को मिलने वाली सब्सिडी और विभिन्न रियायतों पर संकट खड़ा हो गया है। नई नीति की घोषणा अभी तक घोषित नहीं की गई है। ऐसे में बिजली, ट्रांसपोर्ट और ऋण के ब्याज पर मिलने वाली रियायतों को लेकर हिमाचल के उद्योग जगत की चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार ने 16 अगस्त, 2019 को उद्योगपतियों को राहत और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति लागू की थी। इसकी मूल अवधि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो गई थी। इसके बाद मार्च 2026 में नीति को सेवा विस्तार दिया गया। फिर 10 अगस्त से 11 अक्तूबर तक इसकी अवधि बढ़ाई गई थी। लेकिन अब निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी इस औद्योगिक नीति को नए सिरे से आगे नहीं बढ़ाया गया है। हलांकि उद्योगपतियों को आशा है कि सरकार पुरानी उद्योगिक प्रोत्साहन नीति को आगे भी जारी रखेगी। क्योंकि इसी प्रोत्साहन नीति के तहत हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों का विस्तार हुआ है। अब उद्योगपतियों को प्रोत्साहन राशि और सब्सिडी का लाभ मिलेगा या नहीं, इस पर सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।          जारी...

 

सोलन समाचार

सुबाथू रोड बनाने में मशीनें हांफ गई

नौणी विश्‍वविद्यालय राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है

पानी पर राजनीति शुरू

  जारी...

 

हिमाचल समाचार

सुक्‍खू ने दिल्‍ली प्रदर्शन में नया भूचाल खड़ा किया

दुनियां को अलविदा कह गए मेजर विजय मनकोटिया

कुल्‍लू दशहरा पर नजर

  जारी...

 

हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों की पसंद

 

ग्रास साप्‍ताहिक       

                                www.grasindia.com

 

में विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें

 

 

निर्मल निवास, सपरून, सोलन (हिमाचल प्रदेश) - 173211

फोन एवं व्‍टसऐप : 94181 04770