1st Choice of Indian Politicians

हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

SANJAY HINDWAN   Editor

 

Saproon, Solan, Himachal Pradesh- 173211 (INDIA) Contact : +91 94181 04770

संपादकीय

संपर्क करें

विज्ञापन दरें

Old Edition

2nd Last Edition

 

Website of GRAS

     Gras is now a well known political weekly news paper of INDIA. People all over the world are visiting on our website regularly. This site was launched on 26th Jan. 2009 for the purpose of that more peoples of INDIA should know about our Constitution to built the Nation more strong. We got strong queries on our reporting. Now we are getting good response from our readers all over the world.

   आप पोस्‍ट आफिस के खाता IPPB 019110001699 (IFSC Code No. IPOS 0000001) में 300 रुपए जमा करवाकर भी ग्रास पत्रिका के नियमित ग्राहक बन सकते हैं। इस शुल्‍क में आपको 52 संस्‍करण डाक द्वारा भारत वर्ष के किसी भी कोने में भेजे जाएंगे। अपना नाम व पता 9418104770 पर whatsapp & SMS करके भी भेज सकते हैं।  

 

शूलिनी मेला विशेषांक 2026

 

दो भागों में बंटकर रह गया है शूलिनी मेला

     समय के साथ साथ शूलिनी मेला भी दो भागों में बंटकर रह गया है। एक भाग भक्तिभाव से ओत प्रोत होता है और दूसरा हो-हुल्लड़बाजी में डूबा हुआ। कहा जा सकता है सोलन के बाजार में लगने वाला शूलिनी मेला मां शूलिनी की पालकी के नगर भ्रमण के साथ संपन्न होता है और दूसरा सोलन के ठोडो मैदान में जहां लूटपाट का साम्राज्य कायम रहता है। दो भागों में विभाजित हो चुके इस मेले में जहां निशुल्क भंडारे लगाए जाते हैं वहीं ठोडो मैदान में आम जनता से एकत्र पैसे उड़ाए जाते हैं। सोलन के लोग जहां बाजार में लगने वाले मेले को ही असली मेला मानते हैं। वहीं ठोडो मैदान में मेले के दौरान जहां झूले से लेकर स्टालों की लूटपाट होती है उसके चरचे सुनाए जाते हैं। जिला प्रशासन ठोडो मैदान से जहां करोड़ों रुपए की उगाही करता है वहीं मां शूलिनी के नाम पर जिला भर से चंदा एकत्र किया जाता है। शूलिनी मेले के दौरान उद्योगपतियों, फैक्टरी वालों, ट्रक, बस, ओटो और टैंपो से लेकर कई संस्थाओं से इस प्रकार चंदा उगाही की जाती है कि वह शूलिनी मेले में चंदा देने के बाद तौबा कर लेते हैं। जिला प्रशासन ने सोलन जिला में चंदा देने वालों को ‘सोशल ऑबलिगेशन’ शब्द ही भुला दिया है। जिला के छोटे छोटे गांवों में कई तरह के मेले और कार्यक्रम होते हैं। ऐसे कार्यक्रम भी दुकानदारों और व्यापारियों के चंदे से ही चलते हैं। लोग जब आपे छोटे से कार्यक्रम के लिए चंदा मांगने जाते हैं तब व्यापारी अपनी व्यथा बताते हैं कि फलां अफसर का फोन आया था और उसे हमने अपनी क्षमता से ज्यादा चंदा दे दिया है। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि मां शूलिनी के नाम पर जिला प्रशासन किस प्रकार चंदा उगाही करता है। और इस चंदा उगाही के पीछे मां शूलिनी के नाम पर ठोछो मैदान में आयोजित होने वाले हो-हुल्लड़ वाजे कार्यक्रम ही हैं।           जारी...

 

सोलन के व्‍यापारियों को बड़ी मार पड़ती है

     इस बार मां शूलिनी के मेले में बाहर से सामान लाकर स्टालों के जरिए दस दिन तक बिकवाने की मार स्थानीय व्यापारियों पर लंबे समय तक पड़ेगी। सोलन में पर्यटन का सीजन चल रहा है। लोग बाहर से यहां की ठंडी हवाओं में सुकून महसूस करते हैं। लेकिन इस मौसम की मार भी स्थानीय व्यापारियों पर मेले के कारण पड़ने लगी है। बाहर से आने वाले लोग अब मेले के स्टालों में जाकर खरीददारी कर लेते हैं। जबकि यदि मेले के स्टाल कम दिनों के लिए दिए जाते तो व्यापारियों को अपने गर्मी के सीजन का माल बेचने की आसानी रहती। पहले ही स्थानीय व्यापारी ऑन लाइन शॉपिंग से परेशान हैं। बची खुची कसर मेले पर दस दिन तक सामान बेचने वाले स्टालों को लगवाकर पूरी कर दी गई है। वैसे भी सर्दी के मौसम में यहां के दुकानदारों का सामान ज्यादा नहीं बिक पाता है। शीतकालीन छुट्टियां होने के कारण भी बहुत से लोग यहां से बाहर चले जाते हैं। जिसका असर दुकानदारों की कमाई पर पड़ता है। मुश्किल से अप्रेल-मई में वह दुकानदारी कर पाते हैं। फिर जून से मेला और फिर बरसात के बाद सर्दी क्षेत्र को अपने आगोश में लेने लगती है। ऐसे में दुकानदार कब कमाई करेगा और कैसे साल भर अपने परिवार को पालेगा यह चिंता किसी को भी नहीं है। मेले में दस दिन तक टाल लगने के कारण जिला प्रशासन शूलिनी मेला कमेटी को भले ही चंद पैसों का लाभ हो जाता होगा, लेकिन इसके पीछे कितने कारोबारियों के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है, इस पर पुनर्विचार करना जरूरी है। यदि गौर ये देखा जाए तो सोलन में इस प्रकार के व्यापारिक मेले आयोजित करने का रिवाज सा चल पड़ा है।       जारी...

 

धार्मिक आस्‍था बनी रहे      संजय हिंदवान

     यूं तो आजकल धार्मिक आस्था पर बड़ी चोट पड़ी पड़ी है। भगवान राम के मंदिर से चंदा चोरी की खबरों ने धार्मिक आस्था को बड़ी ठेस पहुंचाई हैं। इस दौरान सोलन में मां शूलिनी का मेला भी आ गया है। यहां लोगों की धार्मिक आस्था अभी तक बरकरार है। सोलन के लोगों का अटूट विश्वास है कि मां शूलिनी उन्हें आशीर्वाद देती है और उनके कष्टों को हर लेती है। हमारी भी कामना यही है कि यह आस्था और विश्वास लोगों में बना रहे। हम सभी को शूलिनी मां के इस पवन मेले पर हार्दिक शुभकानाएं देने के साथ उन्हें यह बाताने का प्रयास भी करते हैं कि लोग क्या करें और क्या न करें ताकि यह धार्मिक आस्था सदा बनी रहे। मां शूलिनी को मां दुर्गा, भगवती और सरस्वती का ही रूप माना जाता है। मां शूलिनी को यहां मां दुर्गा की छोटी बहन के रूप में माना जाता है। परंपरा के अनुसार मां शूलिनी अपनी बहन मां दुर्गा से मिलने के लिए जाती है और इसी उपलक्ष्य में यहां मां शूलिनी का मेला मनाया जाता है। इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सोलन का शूलिनी मेला हर साल आषाढ़ (जून) माह में लगता है। पूर्व बघाट (सोलन) रियासत के शाही परिवार की अधिष्ठात्री देवी मां शूलिनी के प्रति सम्मान, श्रद्धा व आस्था जताने के लिए यह सालाना आयोजन होता है। मेले के पहले रोज शूलिनी माता सोलन गांव से सोलन नगर में अपनी बड़ी बहन दुर्गा मात से उनके गंज बाजार स्थित मंदिर में मिलने के लिए दो दिन के प्रवास के लिए आती है।         जारी...

 

हर वर्ष की भंति इस वर्ष भी रंगीन रौशनी से सजा सोलन

     हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मां शूलिनी के नगर सोलन को रंग बिरंगी रौशनी से सजाया गया है। नगर में रंगबिरंगी रौशनी यहां आने वाले को इस बात का एहसाहस करवा देती है कि यहां कोई बड़ा पर्व आयोजित किया जा रहा है। आजकल यहां शूलिनी मेला चल रहा है और पूरे नगर को रंग बिरंगी रौशनी से सजाया और संवारा गया है। मेले को हर्षोल्लास मनाने के लिए बाजार के शुरू होने से पहले ही मुफ्त में खाने पीने के स्टाल और छबीलें दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं। इस स्टालों और छबीलों को लगाने वालों का प्रयास रहता है कि वह अच्छे से अच्छा खाना मेले में घूमने आने वाले लोगों के लिए परोसें। जिला प्रशासन की ओर से मेला समिति मेले का आयोजन करवाती है। इसमें भारी संख्या में जन सहयोग लिया जाता है। मां शूलिनी की पालकी निकलने के पहले दिन से ही तीन दिन तक यहां बाजारों मंे तरह तरह के स्टाल लगाए जाते हैं। जहां लोगों को निशुल्क भोजन करवाया जाता है। कुछ लोग गर्मी का मौसम होने के कारण शीतपेय और कीमती आइस्क्रीम तक लागों को निशुल्क वितरित करते हैं। खाने में जहां कुछ लोग दाल कड़ी चावल वितरित करते हैं वहीं कुछ श्रद्धालु यहां के पारंपरिक पकवान भी मेले के अवसर पर निशुल्क वितरण के लिए तैयार करवाते हैं। सभी का प्रयास रहता है कि उनके स्टालों में भारी भीड़ जमा हो और उनका तैयार किया गया खाना बच न जाए। नगर में कुछ संस्थाएं ऐसी भी हैं जहां मेले के तीनों दिन निशुल्क भंडारा रात दिन चलता है।।      जारी...

 

इस बार भी कहा गया है सफाई का खयाल रखें

     हर बार की तरह इस बार भी भंडारा आयोजित करने वालों से कहा गया है कि सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वह भी अपने वालंटियर्स को भी तैनात करें। भंडारे लगाने वाले लोग खाना खिलाने के साथ साथ सफाई व्यवस्था को बनाए रखने को प्राथमिकता के आधार पर लें। यहां रहने वाले लोगों के लिए मेले के बाद पर्यावरण को बचाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। हलांकि मेला आयोजन समिति ने पर्यावरण को बचाए रखने के लिए विशेष हिदायतें जारी की हैं। सोलन में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम की है पर हर वर्ष उसके लिए यह एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आती है। जिला प्रशासन और सरकार को इसके लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है। शूलिनी मेले के दौरान जो लोग नगर में आते हैं वह यहां के पार्यवारण के प्रति चिंतित रहते हैं। कहा जाता है कि पर्यावरण को अच्छा बनाए रखने के लिए भी लोग मेले के दौरान एक काम जरूर करें, अनावश्यक रूप से गंदगी न फैलाएं। नगर निगम को आदेश दिए जाते हैं कि भंडारों से निकलने वाले कूड़े के ढेर को वह अधिक देर तक जमा न होने दें। साथ ही लोग भी बचे हुए खाने और पत्तलों को एक ही स्थान पर जमा करें। पीने के पानी और हाथ धोने के पानी को सोच समझ कर उपयोग करें। इस बात का खास ख्याल रखा जाए कि मेले के दौरान निकलने वाली गंदगी के कारण नगर की नालियां ब्लॉक न हों और पका हुआ अनाज नालियों में जमा होकर न सड़े। साथ ही ऐसे स्थानों को चिन्हित करके उन्हें साफ किया जाना चाहिए जहां किसी भी प्रकार की गंदगी जमा हो रही हो और उससे दुर्गंध आ रही हो।      जारी...

 

सोलन नगर के कुछ गणमान्‍य व्‍यक्ति

हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों की पसंद

ग्रास साप्‍ताहिक                            www.grasindia.com

में विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें

निर्मल निवास, सपरून, सोलन (हिमाचल प्रदेश) - 173211

फोन एवं व्‍टसप : 94181 04770